Bulleh Shah

कुत्ते जिहा ना कोई वफ़ादार

सुत्ता उठ के कोई नहीं खुश हुंदा बुल्लेया ते बड़े सुत्ते जगा के वेखिया ए कुत्ते जिहा कोई नहीं वफादार डिट्ठा ते टुक्कर सुक्का वी पा के वेखिआ ए तोता जदों वी छड्डिए उड्ड जांदा कईआं चूरिआं पा के वेखिआ ए डंग मारनों कदे वी सप्प नहीं हटदा कईआं दूध पिआ के वेखिआ ऐ बिन […]
साहित्य