Daughter Like Son

Daughter Like Son: बेटों जैसी बेटी

रमेश सेठी बादल Daughter Like Son: गाँव की पगडंडी पर धूप हल्की-हल्की बिखरी थी। मैं चक्की से आटा लेकर लौटती एक लड़की को देख रुक गया। सहज जिज्ञासा से पूछ बैठा – ‘बेटा, तुम किस घर की हो? किसकी बेटी हो?’ उसने बिना हिचक, आत्मविश्वास भरे स्वर में कहा – ‘अंकल जी, मैं मास्टर करमचंद […]
साहित्य