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    कोरोना से कम घातक नहीं डेंगू का डंक, रहें सावधान

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    सच कहूँ/तरसेम सिंह जाखल। पिछले वर्ष कोरोना के अलावा यदि किसी बीमारी ने लोगों को सबसे ज्यादा डराया तो वह डेंगू (Dengue) का डंक था। एसएमओ डॉ. राजेश क्रांति ने बताया कि स्वास्थ्य एवं मलेरिया विभाग की ओर से 16 मई को राष्टीय डेंगू दिवस (Dengue) मनाया जाता है। इसको लेकर जाखल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक कार्यक्रम का आयोजन कर सीएचसी जाखल के अंतर्गत सभी पीएचसी प्रभारी चिकित्साधिकारियों, कर्मचारियों, एएनएम और आशा वर्करों को निर्देश दिए गए हैं कि वे रैली, गोष्ठी आदि के माध्यम से डेंगू के प्रति लोगों को जागरूक करें। इस अवसर पर अवतार सिंह मल्टीपरपज हेल्थ वर्कर, अशोक कुमार बी ए डीी, टेक्निकल ऑफिसर सुरेंद्र कुमार, स्टाफ नर्स इंचार्ज प्रवीण कुमारी, सुशील कुमार क्लर्क, दीपक सिंह, रमनदीप, विजय कुमार, स्टेनो प्रवीण कुमार, दर्शन सिंह सुरेश कुमार इत्यादि मौजूद रहे।

    दिन में काटता है डेंगू का मच्छर: डॉ. राजेश

    जाखल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के एसएम डॉक्टर राजेश क्रांति ने बताया कि डेंगू (Dengue) एडिज मच्छर के काटने से होता है, जो दिन में काटता है। इस मच्छर के शरीर पर सफेद धारियां होती हैं, जिसके कारण इसे टाइगर मच्छर भी कहा जाता है। यह मच्छर ज्यादा ऊंचाई तक नहीं उड़ पाता। हेल्थ वर्कर अवतार सिंह ने बताया कि इसके इसका लार्वा साफ पानी में पनपता है। घर के अंदर कूलर, फ्रिज की ट्रे, छत पर रखे पानी का कोई पात्र, पुराना टायर, गमला आदि में लार्वा पनपने की सबसे अधिक आशंका रहती है। काटने पर पांच से छह दिन बाद लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

    ये हैं लक्षण

    • त्वचा पर चकत्ते
    • तेज सिर दर्द
    • पीठ दर्द
    • आंखों में दर्द
    • तेज बुखार
    • मसूड़ों से खून बहना
    • नाक से खून बहना
    • जोड़ों में दर्द
    • उल्टी
    • डायरिया

    ऐसे करें बचाव

    • फ्रिज की ट्रे व कूलर में इकट्ठा पानी को एक सप्ताह में जरूर बदल दें।
    • सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
    • ऐसे कपड़े पहने जिससें कि शरीर का अधिक से अधिक भाग ढका रहे।
    • मच्छरनाशक दवा छिड़कने वाले कर्मचारी आएं तो उन्हें मना न करें।
    • घर के आसपास पानी न इकट्ठा होने दें।
    • गमलों, पुराने टायर व अन्य पात्रों का पानी बदलते रहें।
    • घर की खिड़कियों पर जाली या स्क्रीन होनी चाहिए।
    • बुखार आने पर कोई भी दर्द निवारक न लें।
    • जलभराव वाले स्थानों को मिट्टी से ढक दें।
    • इकट्ठा पानी पर जला हुआ मोबिल आयल-मिट्टी का तेल डालें।

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