Hisaab Barabar

हिसाब बराबर

Sahitya: दादाजी, पापा और मानी बाजार गए। मानी बोली, ‘‘पापा। भूख लगी है।’’ पापा बोले-‘‘घर जाकर खाना खाएँगे।’’ उसने पूछा, ‘‘घर कब जाएँगे?’’ दादा हँसे। बोले, ‘‘अभी तो आए हैं।’’ मानी उदास हो गई। बोली, ‘‘तेज भूख लगी है।’’ पापा समझाने लगे, ‘‘बाजार का नहीं खाते।’’ मानी ने इधर-उधर देखा। पूछा, ‘‘बाजार में बहुत कुछ […]
साहित्य