महंगाई अब मुद्दा ही नहीं रही
चाहे पिछले सालों की तुलना में संसद के कामकाज के आंकड़े अच्छे दिखते हैं लेकिन एक स्वस्थ, तार्किक, मुद्दों पर आधारित बहस लगभग गायब सी हो गई है और उसकी जगह मुद्दाविहिन, अतार्किक बहस ने ले लिया है। राजनीति के सिद्धांत खत्म होते जा रहे हैं। सत्ता हासिल करना ही आज एकमात्र सिद्धांत रह गया है।
जलवायु आपातकाल और भारत
जो प्रदूषण का बड़ा कारण है। ई-वाहनों को बढ़ावा देने के दावे कमजोर साबित हो रहे हैं।
इन हालातों में विकास और प्रदूषण को अलग-अलग रखना सबसे बड़ी समस्या है


























