हिंदी अब विदेशियों के लिए भी बनी रोजी-रोटी की भाषा

Published On

पोर्ट लुई (मॉरीशस) (एजेंसी)। हिंदी भाषा (Hindi language) सीखने और पढ़ने से रोजगार नहीं मिलने का भ्रम टूटने लगा है तथा अब तो कई विदेशी भी मान रहे हैं कि हिंदी ही उनकी रोजी-रोटी का जरिया है।

गोस्वामी तुलसीदास नगर में आयोजित तीन दिवसीय 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन में आये चीन में हिंदी के पुरोधा एवं भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की चीन यात्रा के दौरान उनके अनुवादक रहे जियान चिग खेईना ने वह चीन में हिंदी के सैनिक हैं और उनकी रोजी-रोटी हिंदी भाषा के कारण ही चलती है।

वह चीन में हिंदी के प्रोफेसर हैं। उन्होंने कहा कि भारत को जानने के लिए हिंदी सीखना जरूरी है। हिंदी से ही भारत की सभ्यता एवं संस्कृति हो समझा जा सकता है। खेईना ने कहा कि वर्ष 2000 के बाद से चीन में हिंदी की स्थिति बहुत अच्छी हुई है।

अब वहां 15-16 विश्वविद्यालयों में हिंदी (Hindi language) की पढ़ाई हो रही है। उन्होंने कहा कि चीन के लोगों को लगता है कि भारत को समझने की जरूरत है। वहां की युवा पीढ़ी भारत को समझना चाहती है और भारत में व्यापार करना चाहती है।

Hindi News से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।

 

 

About The Author

Related Posts