संत-फकीर के वचनों पर अमल करना जरूरी

Anmol Vachan, True Saint

सरसा। सच्चे दाता रहबर, मुर्शिद-ए-कामिल शाह सतनाम जी, शाह मस्ताना जी का रहमों कर्म है, वो ही करन-करावन हार हैं और वो तिनके से काम ले लेते हैं। संत, पीर-फकीर जो इस दुनिया में आता है वो आराम के लिए नहीं आता, वो पूरी दुनिया को आराम देने के लिए और उनका भला करने के लिए आता है। संत, फकीर सबके भले के लिए दुआ करते है और मालिक की बिछुड़ी रूहों को मालिक से मिलाने के लिए आते हैं। पूज्य गुरू जी ने फरमाया कि घोर कलियुग का समय है, हर किसी को सेवा व सुमिरन पर ध्यान देना चाहिए। कलियुग का समय बड़ा ही भयानक है, हालांकि ऐसे भयानक समय में उनका कुछ नहीं बिगड़ा करता जो सतगुरू के वचनों पर अमल किया करते हैं।

इसलिए संत, पीर-फकीर के वचनों पर अमल करना अति जरूरी है। आप जी ने फरमाया कि इन्सान को अपने गुरू, पीर-फकीर के वचनों पर अमल करना चाहिए। तभी जीवन में खुशियां आती हैं। आप जी ने फरमाया कि अगर इन्सान के कहने मात्र से ही सब कुछ हो जाए तो शायद इन्सान अपने सिवा किसी को जीने ही न दे। इन्सान क्यों, किंतु, परंतु में उलझा रहता है। इसलिए मन के हाथों मजबूर मत हुआ करो, क्योंकि जो मन के हाथों मजबूर हो जाता है वो मालिक से दूर हो जाता है। पूज्य गुरू जी ने फरमाया कि सुमिरन किया करो, सेवा करो, सबका भला मांगा करो। जो इन्सान सबका भला मांगते हुए, वचनों पर पक्का रहते हुए आगे बढ़ता है उसे अंदर-बाहर कोई कमी नहीं आती।

 

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