सिरसा सिमट के रह गया सिरों की सुनामी देख कर

दीवानगी ऐसी जो धरती ने न कभी देखी न सुनी होगी सिरों कि सुनामी में सिमटा सिरसा समय को बता रहा था इस धरा पर कभी भी कही भी किसी को प्यार करने किसी पर एतबार करने किसी पर जां निसार करने वालो का ऐसा मेला न देखा है न देखा जाएगा।

हर सड़क जाम, हर राह सिसकती, हर गली ठहरी सी, हर डगर नाकाम, मंज़िल से जुड़े कदमो की कदमताल देख बेहाल सिरसा बरसो बाद जिंदा हुआ है। खबर बस इतनी की वो आये है उनके दीवाने आये है। रौनक स्वागत करने को उतारू, खुशिया खिलखिलाने को बेबस, हंसी हँसते नही थकती, भीड़ भीड़ से भिड़ती, नज़ारा ऐसा की मीलो जाम है पसरा,नज़ारा ऐसा की खाशो आम रहा न बाकी। यू लगा शहर शहर से मिलने, गाँव गांव का होने,गली गली को छूने निकल पड़े सभी मिल कर झूमे।

छाया: सुशील कुमार

आंखों की सीमाएं जहां समाप्त हो जाये, सिरों का हुजूम उसके पार बहुत दूर से दर पर सर झुकाने को बेताब हो बढ़ चला मानो। शब्दो की भी सरहद होती है तो उसे तोड़ कर देखो कलम की जिद्द अगर है तो उसको छोड़ कर देखो ये सिरसा बोल रहा है जरा सब्र से सुन कर तो देखो। ये आवाज चंडीगढ़ से हो कर दिल्ली दरबार तक गूंज रही है ये मस्ताना की मस्तानी फौज हैं जिसे रोकने वाले रुक गये टोकने वाले टूट गए। जो रूठे जो छूटे जो टूटे जो भागे सब लौट कर सिरसा के फिर हो चले है। निंदक हैरान, बुराई परेशान , सिरसा क्या सुना रहा है? यह एक राह नई दिखा रहा है।

जो समझ रहे है वो संभलेंगे जो सोच रहे है सोचते रह जाएंगे दीवानों का ये कारवां जो बढ़ चला है न ये रुकेगा न ही कोई रोक पायेगा। जो जुड़ेगा मज़िल पायेगा जो छूटेगा वो पछतायेगा मुद्दा बस इतना कि समय रहते सतगुरु की शक्ति ईश्वर की भक्ति पर नज़र टिकाने वाला पार पा जाएगा ये एक संकेत है।

यह एक बानगी है कि डेरा सच्चा सौदा के भक्तों की भक्ति उनकी दीवानगी चाहत सड़को को समेट देती है राहों को छोटा कर देती है पंडाल को समेट देती है ये सरेआम लगा जाम बताने को काफी है कि राम रहीम का जलवा कायम है,लाख आरोप बदनाम करने की कोशिश, इस बेशुमार प्यार के आगे नाकाम है। एक घिनौना आरोप लगने पर जहां भाई भाई का साथ छोड़ देता है, वहां करोड़ो भाई बहन आज भी अपने मुर्शिरद के मुरीद बन मस्ताना जी की नगरी में एक हो दुनिया को बता रहे है देखो साजिशें नाकाम है, आरोप झूठे है। हमारे गुरु सच्चे है तो सोचना पड़ेगा ही मुझे तुम्हे पूरी दुनिया जहान को कुछ तो है .. आखिर किसी ने सही लिखा है सच परेशान हो सकता है, पराजित नहीं l

पण्डित संदीप

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