Live: सलाबतपुरे में जुटे राम-नाम के दीवाने, खचाखच भरे पंडाल

सलाबतपुरा (सच कहूँ न्यूज)। उत्तर भारत के कई इलाकों में कड़कड़ाती ठंड और शीतलहर का प्रकोप जारी है। लेकिन राम नाम के दीवाने कड़कड़ाती ठंड में भी इन्सानियत के भलाई के काम करने से पीछे नहीं रहते। डेरा सच्चा सौदा के दूसरे गुरु जी पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के 104वें पावन अवतार माह के उपलक्ष्य में रविवार को पंजाब के सलाबतपुरा में नामचर्चा का आयोजन किया जा रहा है। सुबह से ही साध-संगत निरंतर आना जारी है। आइयें देखते हैं नजारा…

Salabtpura

मुर्शिद के लिए तड़प, खुशियों से भर देती है झोलियां

 पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सतगुरु, मौला, परमपिता परमात्मा के लिए आपका प्यार महौब्बत काबिल-ए-तारीफ है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि वो एक अद्भुत दृश्य होता है जब अपने मुर्शिद के लिए मुरीद इस तरह तड़प जाते हैं, जैसे पानी के बिना मछली। अगर ऐसे इन्सान वचनों पर पक्के हैं तो सतगुरु, मौला भी अमृत पिला देते हैं। बस! भावना सही होनी चाहिए। रूहानियत में यही असूल है जैसी जिसकी भावना वैसा ही फल दे।

पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि दो तरह के लोग हंै एक सतगुरु मौला से सच्चा प्यार करते हैं, वहीं दूसरी और एक दिखावे का इजहार करते हैं। एक सतगुरु मौला के दर्शन दीदार के बिना तड़प जाते हैं और एक सिर्फ दिखावा करते हैं। जैसी भावना है, जैसी श्रद्धा है फल तो वैसा ही मिलना है। जैसे आप अपने मुर्शिद-ए-कामिल से तार जोड़ कर रखते हैं, तो सतगुरु मौला एक पल भी आपको नहीं भूलाते। इन्सान का मन हावी हो सकता है, भटका सकता है, लेकिन सतगुरु मौला जब एक बार हाथ पकड़ लेते हैं तो छोड़ते नहीं, न इस जहान में और न ही अगले जहान में। बस! इन्सान वचनों पर अमल करे, सेवा-सुमिरन करे, फिर मुर्शिद-ए-कामिल कोई कमी नहीं छोड़ेंगे।

पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि उदाहरण सहित समझाते हुए फरमाते हैंकि जैसे कूंज (पक्षी) कितनी भी दूर चली जाए, लेकिन अपना ध्यान बच्चों में ही रखती है। गाय पांच कोस दूर भी अगर चरती है तो भी वह अपना ध्यान बछड़े में ही रखती है। इसलिए आप जितनी सेवा, सुमिरन करते हो, मालिक बढ़-चढ़ कर आपको खुशियों से मालामाल करे।
पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि शमां तो हर पल, हर जगह जलती रहती है, ये अलग बात है कि नजर किसी-किसी को आती है। पर उस शमां की लौ को ताकते हुए जो सेवा में चलते हैं, सतगुरु मौला दोनों जहान में उनकी सार-संभाल करते हैं और सचखंड में उनके नाम सुनहरी अक्षरों में लिखे जाते हैं। आप जी ने फरमाया कि आप यहां सेवा करते हैं तो दरगाह में हाजरी लगती है। आप यहां तड़पते हैं तो सतगुरु मौला आपको ही नहीं, आपकी आने वाली व बीती हुई कुलों को भी रहमतों से बख्शते रहते हैं।

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