प्यारे सतगरू जी ने जीव को बख्शी नई जिंदगी

Published On

सन् 1975 में हमारी ढ़ाणी में पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के सत्संग का कार्यक्रम चल रहा था। सत्संग के दौरान ही पूजनीय परम पिताजी ने सारी साध-संगत को फरमाया,‘‘सारी साध-संगत इसी तरह बैठी रहे। किसी ने भी नहीं उठना, हम अभी आते हैं।’’ उक्त वचन फरमाने के बाद पूजनीय परम पिता जी पूर्व दिशा की ओर ढ़ाणी निहाल सिंह की तरफ चल पड़े। जब पूजनीय परम पिता जी तीन एकड़ की दूरी तक गए तो वहां कपास की फसल में एक व्यक्ति बेहोश पड़ा था। वह व्यक्ति पास के गांव हांडीखेड़ा (सरसा) का निवासी था। उसे मधु-मक्खियों ने काट लिया था। उस समय पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के साथ सेवा समिति वाले कुछ सेवादार भी थे। पूजनीय परम पिता जी ने उस व्यक्ति को वहां से उठवाया और उसका इलाज करवाया। इस प्रकार घट-घट की जानने वाले सतगुरू मुसीबत में फंसे प्रत्येक इन्सान की रक्षा करते हैं।
श्री बाग चंद, ढ़ाणी वरियाम सिंह, सरसा

अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और TwitterInstagramLinkedIn , YouTube  पर फॉलो करें।

About The Author

Related Posts