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वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा-बॉन्ड मार्केट को मिलेगा और बल, सरकार उठाएगी नए कदम
भारत में विदेशी निवेश बढ़ाने की तैयारी, वित्त मंत्री ने दिए बड़े संकेत
Foreign investment in India: नई दिल्ली। देश में आर्थिक विकास की रफ्तार को बनाए रखने और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए केंद्र सरकार लगातार नए प्रयास कर रही है। इसी क्रम में केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में विदेशी पूंजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई और महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बॉन्ड मार्केट से जुड़े हालिया सुधार केवल शुरुआत हैं और सरकार निवेश के नए अवसर तैयार करने पर काम कर रही है। India Investment Policy
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक आर्थिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि भारत को अपनी विकास आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अधिक विदेशी पूंजी की जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाल में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और बैंकों को विदेशों से पूंजी जुटाने की अनुमति देना अंतिम कदम नहीं है, बल्कि यह व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा है।
बॉन्ड मार्केट बनेगा निवेश का बड़ा माध्यम
सीतारमण ने कहा कि भारत का बॉन्ड बाजार विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बन सकता है। वर्तमान में सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश की जो सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, उन्हें भविष्य में और विस्तारित किया जा सकता है। उनका मानना है कि मजबूत बॉन्ड बाजार देश की वित्तीय प्रणाली को अधिक गहराई प्रदान करेगा और विदेशी निवेशकों के लिए भरोसेमंद मंच तैयार करेगा। उन्होंने बताया कि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक मिलकर ऐसे उपायों पर काम कर रहे हैं, जिनसे पूंजी बाजार में निवेश का प्रवाह लगातार बना रहे और आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सके।
वित्त मंत्री ने कहा कि बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि देश का विशाल घरेलू बाजार और बढ़ती खपत अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करती है, लेकिन कई महत्वपूर्ण कच्चे माल और औद्योगिक उत्पादों के लिए भारत अभी भी आयात पर निर्भर है। उनके अनुसार, वैश्विक स्तर पर टैरिफ नीतियों में बदलाव, कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान जैसी चुनौतियां आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में विदेशी मुद्रा भंडार आर्थिक सुरक्षा कवच का काम करता है। India Investment Policy
तेल कीमतों और समुद्री जोखिमों पर चिंता
सीतारमण ने कहा कि केवल कच्चे तेल की कीमतें ही चिंता का विषय नहीं हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिम भी भारत की आयात लागत को प्रभावित कर रहे हैं। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों के लिए बीमा और सुरक्षा खर्च में वृद्धि का असर भारत के आयात बिल पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों को देखते हुए सरकार आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और बाहरी झटकों से निपटने के लिए आवश्यक तैयारी कर रही है।
वित्त मंत्री ने वैश्विक उर्वरक बाजार की स्थिति पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि कुछ देशों द्वारा निर्यात कम करने के कारण पिछले वर्ष आपूर्ति को लेकर चिंताएं पैदा हुई थीं, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिति बेहतर होती दिखाई दे रही है। विशेष रूप से चीन के दोबारा निर्यात बाजार में सक्रिय होने से वैश्विक आपूर्ति में सुधार के संकेत मिले हैं।
टियर-2 शहर बन रहे नए टेक्नोलॉजी हब
सीतारमण ने भारत में तेजी से विकसित हो रहे डेटा सेंटर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) सेक्टर को आर्थिक विकास का नया इंजन बताया। उन्होंने कहा कि पहले जहां तकनीकी निवेश केवल बड़े महानगरों तक सीमित था, वहीं अब छोटे और मध्यम शहर भी इस परिवर्तन का हिस्सा बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के तुमकुरु और मंगलुरु जैसे शहरों में भी निवेश बढ़ रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं। इससे न केवल तकनीकी विकास को बढ़ावा मिलेगा बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाएं भी मजबूत होंगी।
वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर निवेश-अनुकूल वातावरण तैयार कर रही हैं। राज्य सरकारें केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि घरेलू और विदेशी निवेशकों से सीधे संवाद कर उन्हें आकर्षित करने का प्रयास भी कर रही हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि तकनीक, डेटा प्रबंधन और वैश्विक सेवा केंद्रों के विस्तार से भारत आने वाले वर्षों में दुनिया के प्रमुख निवेश केंद्रों में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा। India Investment Policy