महाराष्ट्र की तीसरी देहदानी बनीं माता ग्यानीबाई इन्सां, मरणोपरांत भी मानवता की सेवा में समर्पित किया शरीर

6. महाराष्ट्र की तीसरी देहदानी बनीं माता ग्यानीबाई इन्सां, चिकित्सा शिक्षा के लिए दान किया पार्थिव शरीर

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सिंदेवाही (चंद्रपुर, महाराष्ट्र)। मां का प्रेम, त्याग और संस्कार कभी समाप्त नहीं होते। मां अपने जीवन में ही नहीं, बल्कि अपने जाने के बाद भी अपने कर्मों से मानवता को नई राह दिखा सकती है।* इसी भावना को चरितार्थ करते हुए महाराष्ट्र के जिला चंद्रपुर की तहसील सिंदेवाही में उप कृषि अधिकारी के पद पर कार्यरत श्री सुरजित ज्ञानचंद कलिये जी ने अपनी पूजनीय माता श्रीमती ग्यानीबाई ज्ञानचंद कलिये इन्सां जी (आयु 80 वर्ष) के मरणोपरांत पार्थिव शरीर को चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए दान कर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की।

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यह पुनीत कार्य पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा चलाए जा रहे 176 मानवता भलाई कार्यों में से एक *‘अमर सेवा मुहिम’* के अंतर्गत किया गया। इस मुहिम का उद्देश्य मरणोपरांत भी मानव देह को चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के माध्यम से जनकल्याण के लिए समर्पित करना है।

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पूजनीय माता जी का पार्थिव शरीर *पंडित महावीर प्रसाद मेमोरियल आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल, पी.के. यूनिवर्सिटी, ग्राम थनरा, जिला शिवपुरी, मध्य प्रदेश* को दान किया गया। इस महान सेवा के माध्यम से माता जी ने मरणोपरांत भी समाज के लिए उपयोगी योगदान दिया और अपने जीवन के अंतिम पड़ाव के बाद भी मानवता की सेवा का संदेश छोड़ गईं।

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इस अवसर पर कॉलेज एवं अस्पताल के प्राचार्य *डॉ. नीरज कुमार खरे जी* ने इस महान कार्य की सराहना की। उन्होंने इस प्रकार के सेवा कार्यों को समाज के लिए प्रेरणादायक माना।

मां का बिछुड़ना परिवार के लिए ऐसा दुःख है, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। मां की ममता, उनका स्नेह, उनके आशीर्वाद और उनकी यादें सदैव परिवार के हृदय में जीवित रहती हैं। ऐसे दुःखद समय में अपनी पूजनीय माता जी की देह को मानवता के कल्याण के लिए समर्पित करना उनके प्रति सम्मान, संस्कार और सेवा भावना का भावपूर्ण उदाहरण है।

पूजनीय माता ग्यानीबाई ज्ञानचंद कलिये इन्सां जी का यह महान योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उनका पार्थिव शरीर भले ही इस संसार में नहीं रहा, लेकिन उनके इस नेक कार्य से चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों और समाज के अनेक लोगों को लाभ मिल सकता है। उनका यह सेवाभावी कदम दूसरों को भी देहदान के महत्व को समझने और मानवता की भलाई के लिए आगे आने की प्रेरणा देता रहेगा।mh-2

इस दुःखद घड़ी में समस्त परिवार के प्रति हार्दिक संवेदनाएं एवं श्रद्धासुमन अर्पित हैं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें तथा परिवार को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति दें।

  1. *विनम्र श्रद्धांजलि एवं कोटि-कोटि नमन।*
  2. *शरीरदानी माता ग्यानीबाई ज्ञानचंद कलिये इन्सां जी अमर रहें।*
  3. देहदान के क्षेत्र में महाराष्ट्र की साध-संगत का अनुकरणीय योगदान

महाराष्ट्र में देहदान की इस पुनीत परंपरा में अब तक की जानकारी के अनुसार:

1\. प्रथम देहदानी — माता केसरा बाई इन्सां जी: नवंबर 2011 में नागपुर, महाराष्ट्र के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज, नागपुर में देहदान कर मानवता की सेवा में मिसाल कायम की।

2\. द्वितीय देहदानी — माता चरणजीत इन्सां जी: मार्च 2025 में नागपुर, महाराष्ट्र में देहदान कर चिकित्सा अनुसंधान हेतु अपना पार्थिव शरीर AIMS गोरखपुर उत्तर प्रदेश कोसमर्पित किया।

3\. तृतीय देहदानी — माता ज्ञानीबाई ज्ञानचंद कलिये इन्सां जी: 12 अक्टूबर 2026 को किसाननगर, जिला चंद्रपुर, महाराष्ट्र से देहदान पंडित महावीर प्रसाद मेमोरियल आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल, पी.के. यूनिवर्सिटी, ग्राम थनरा, जिला शिवपुरी, मध्य प्रदेश को दान किया देहदान कर मानवता की सेवा में अमूल्य योगदान दिया। माता ज्ञानीबाई इन्सां जी किसाननगर, जिला चंद्रपुर की प्रथम देहदानी हैं। आपके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वे महाराष्ट्र की तीसरी देहदानी हैं। तीनों महान देहदानियों को कोटि-कोटि नमन। उनकी निःस्वार्थ सेवा मानवता के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।

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