US Midterm Elections 2026: अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में भारतीय-अमेरिकी वोटर्स क्यों अहम? ट्रंप और दोनों पार्टियों के लिए क्या मायने
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में भारतीय-अमेरिकी वोटर्स क्यों अहम? ट्रंप और दोनों पार्टियों के लिए क्या मायने
US Midterm Elections 2026: अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं पर भी राजनीतिक दलों की नजर है। राष्ट्रपति चुनाव के मुकाबले मिडटर्म चुनावों में स्थानीय और राज्य स्तर के मुद्दों की भूमिका काफी अहम होती है। ऐसे में भारतीय मूल के मतदाताओं के लिए अर्थव्यवस्था, महंगाई, रोजगार, इमिग्रेशन और नागरिक अधिकार जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
भारतीय-अमेरिकी समुदाय लंबे समय से डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर झुकाव रखता रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस समर्थन में बदलाव देखने को मिला है। 2026 के Indian American Attitudes Survey के अनुसार, समुदाय अब भी डेमोक्रेटिक झुकाव वाला है, लेकिन पार्टी से जुड़ाव पहले की तुलना में कम हुआ है।
भारतीय-अमेरिकी वोटर्स में क्या बदलाव आया?
Carnegie Endowment for International Peace के 2026 सर्वे के मुताबिक, भारतीय-अमेरिकियों में खुद को डेमोक्रेट बताने वालों की हिस्सेदारी 2020 के 52 फीसदी से घटकर 2026 में 46 फीसदी रह गई है। वहीं रिपब्लिकन पहचान रखने वालों की हिस्सेदारी 15 फीसदी से बढ़कर 19 फीसदी हुई है।
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव उन लोगों में हुआ है जो खुद को इंडिपेंडेंट बताते हैं। इनकी हिस्सेदारी 2024 के 25 फीसदी से बढ़कर 2026 में 29 फीसदी हो गई है। यानी डेमोक्रेटिक पार्टी से दूरी बनाने वाले सभी मतदाता सीधे रिपब्लिकन खेमे में नहीं जा रहे, बल्कि एक बड़ा हिस्सा खुद को स्वतंत्र मतदाता के रूप में देख रहा है।
ट्रंप को लेकर भारतीय-अमेरिकियों की राय क्या है?
2026 के Carnegie सर्वे में भारतीय-अमेरिकियों के बीच डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के प्रति कुल मिलाकर सकारात्मक रुझान नहीं दिखता। सर्वे में ट्रंप को 100 में 32 का औसत रेटिंग स्कोर मिला, जबकि रिपब्लिकन पार्टी को 34 अंक मिले। वहीं डेमोक्रेटिक पार्टी को 53 अंक मिले।
हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि पूरा भारतीय-अमेरिकी समुदाय एक ही राजनीतिक दिशा में वोट करता है। सर्वे में उम्र, आय, शिक्षा, धर्म और अमेरिका में रहने की अवधि के आधार पर राजनीतिक पसंद में अंतर दिखाई देता है।
2024 में भी दिखा था बदलाव
2024 के भारतीय-अमेरिकी वोटर सर्वे में भी डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन बरकरार रहा था, लेकिन ट्रंप के पक्ष में पहले की तुलना में बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। उस सर्वे में 47 फीसदी भारतीय-अमेरिकियों ने खुद को डेमोक्रेट बताया था, जबकि 21 फीसदी रिपब्लिकन और 26 फीसदी इंडिपेंडेंट थे। राष्ट्रपति चुनाव के लिए 61 फीसदी पंजीकृत भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं ने कमला हैरिस का समर्थन करने की इच्छा जताई थी, जबकि 32 फीसदी ने ट्रंप का नाम लिया था।
इससे संकेत मिलता है कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय में रिपब्लिकन पार्टी के लिए कुछ जगह जरूर बनी है, लेकिन इसे डेमोक्रेटिक पार्टी से बड़े पैमाने पर पूर्ण राजनीतिक बदलाव के तौर पर देखना सही नहीं होगा।
किन मुद्दों पर भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं की नजर?
भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं के लिए घरेलू मुद्दे काफी महत्वपूर्ण हैं। 2026 Carnegie सर्वे के मुताबिक महंगाई और कीमतें लोगों की व्यक्तिगत चिंताओं में सबसे ऊपर हैं। इसके बाद रोजगार और व्यापक अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दे आते हैं।
इमिग्रेशन भी इस समुदाय के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा है, खासकर H-1B वीजा, कानूनी आव्रजन और अमेरिका में परिवारों के भविष्य से जुड़े सवालों के कारण। हालांकि सर्वे के मुताबिक विदेश नीति और अमेरिका-भारत संबंध सीधे तौर पर वोट तय करने वाले सबसे प्रमुख मुद्दों में नहीं हैं।
H-1B और इमिग्रेशन क्यों है बड़ा मुद्दा?
भारतीय मूल के बड़ी संख्या में प्रोफेशनल अमेरिका में टेक्नोलॉजी, मेडिकल, इंजीनियरिंग और दूसरे क्षेत्रों में काम करते हैं। ऐसे में वीजा नियमों और कानूनी आव्रजन नीति में बदलाव का इस समुदाय पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन नीतियों और H-1B व्यवस्था को लेकर भारतीय-अमेरिकियों में अलग-अलग राय है। कुछ लोग सख्त आव्रजन व्यवस्था का समर्थन करते हैं, जबकि दूसरे कानूनी आव्रजन और हाई-स्किल्ड वर्कर्स से जुड़े नियमों को लेकर चिंता जताते हैं। 2026 के सर्वे में ट्रंप के इमिग्रेशन हैंडलिंग को लेकर भारतीय-अमेरिकियों के बीच नकारात्मक आकलन दर्ज किया गया।
क्या भारतीय-अमेरिकी वोटर्स 'किंगमेकर' बनेंगे?
भारतीय-अमेरिकी समुदाय का राजनीतिक प्रभाव जरूर बढ़ा है, लेकिन पूरे समुदाय को किसी एक पार्टी का निश्चित वोट बैंक मानना सही नहीं होगा। 2026 के आंकड़े बताते हैं कि डेमोक्रेटिक पार्टी अभी भी भारतीय-अमेरिकियों के बीच आगे है, लेकिन पार्टी से जुड़ाव पहले की तुलना में कमजोर हुआ है।
साथ ही, इंडिपेंडेंट मतदाताओं की संख्या बढ़ी है और समुदाय के भीतर उम्र, आय और धार्मिक पहचान के आधार पर राजनीतिक पसंद अलग-अलग दिखाई देती है।
इसलिए 3 नवंबर के मध्यावधि चुनाव में भारतीय-अमेरिकी वोटर्स की भूमिका को समझने के लिए सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं होगा कि वे डेमोक्रेट या रिपब्लिकन में से किसके करीब हैं। महंगाई, रोजगार, इमिग्रेशन, नागरिक अधिकार और स्थानीय चुनावी मुद्दे भी उनके मतदान व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं।
अमेरिका-भारत संबंध से ज्यादा घरेलू मुद्दे अहम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच राजनीतिक संबंधों की चर्चा अक्सर भारतीय-अमेरिकी समुदाय के संदर्भ में होती है, लेकिन सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि विदेश नीति का प्रभाव सीमित है। भारतीय-अमेरिकी मतदाता अपने रोजमर्रा के आर्थिक और सामाजिक मुद्दों को भी प्राथमिकता देते हैं।
यही वजह है कि 2026 के मिडटर्म चुनावों में इस समुदाय के राजनीतिक रुझान को समझने के लिए अमेरिका में महंगाई, रोजगार, इमिग्रेशन और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
कुल मिलाकर, भारतीय-अमेरिकी मतदाता अब भी डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर झुकाव रखते हैं, लेकिन 2026 के आंकड़े बताते हैं कि यह समर्थन पहले की तरह मजबूत और स्वचालित नहीं है। इंडिपेंडेंट मतदाताओं की बढ़ती संख्या दोनों प्रमुख पार्टियों के लिए इस समुदाय को महत्वपूर्ण बना रही है। हालांकि इन आंकड़ों के आधार पर यह कहना संभव नहीं है कि भारतीय-अमेरिकी मतदाता किसी एक पार्टी को चुनाव में निर्णायक बढ़त दिलाएंगे।