Parmarthi Diwas: परमार्थ के लिए सदैव समर्पित रहे पूजनीय बापू नंबरदार मग्घर सिंह जी

पूजनीय बापू मग्घर सिंह जी की पावन स्मृति में विशेष

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Heartfelt Tributes to Revered Bapu Nambardar Maghar Singh Ji: ईश्वर के प्यारे भक्त अपनी कथनी और करनी से समाज में ऐसी छाप छोड़ जाते हैं, जो सदियों तक मानवता के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहती है। पूजनीय बापू नंबरदार मग्घर सिंह जी का जीवन धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों से परिपूर्ण तथा मानवता के लिए वरदान था। आप जी ने अपने सतगुरु के प्रति प्रेम और बेमिसाल त्याग की भावना का परिचय देते हुए, अपने लाडले एवं इकलौते सुपुत्र (पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां) को अपने सतगुरु के एक इशारे पर उनके चरणों में अर्पित कर दिया।

मेहनत करके खाने, सादगी और जरूरतमंदों की मदद करने जैसे गुण पूजनीय बापू जी के व्यक्तित्व को चार चांद लगाते थे। आपजी का जन्म वर्ष 1929 में गाँव श्री गुरूसर मोडिया, जिला श्रीगंगानगर में पूजनीय पिता श्री चित्ता सिंह और माता संत कौर जी के घर हुआ। आपजी के ताऊ जी के घर कोई संतान न होने के कारण आपजी को उन्होंने गोद लिया हुआ था, इसीलिए आपजी पूजनीय ताऊ संता सिंह जी व माता चन्द कौर जी को ही अपने माता-पिता मानते थे। बचपन से ही आप जी सद्गुणों से भरपूर थे और परमात्मा की भक्ति में लीन रहते थे। धार्मिक प्रवृत्ति होने के कारण भगवत गीता और जन्म साखी जैसे पवित्र ग्रंथ आप जी घर में ही रखते थे और समय मिलने पर पढ़ते रहते थे।

आपजी ने पूजनीय परमपिता शाह सतनाम जी महाराज से गुरुमंत्र की अनमोल दात प्राप्त की। आप जी का शुभ विवाह गाँव किक्करखेड़ा, तहसील अबोहर, जिला फाजिल्का के पूज्य श्री गुरदित्त सिंह जी और पूज्य माता जसमेल कौर जी की सुपुत्री नसीब कौर जी इन्सां के साथ हुआ। पूजनीय बापू जी परमात्मा पर दृढ़ विश्वास रखते थे। आप जी का गांव के महात्मा त्रिवेणी दास जी के साथ भी बहुत प्रेम था। परमात्मा के प्रति विश्वास ही था कि घर में 18 वर्षों तक औलाद न होने के बावजूद आप जी को पूरा भरोसा था कि वह परमात्मा जरूर रहमत करेगा। वास्तव में पूजनीय बापू जी एक महान आत्मा थे, जिनके घर को परमपिता परमात्मा ने सच्चे सतगुरु के अवतार धारण के लिए चुना था। संत जी अक्सर कहते थे कि आपके घर में कोई आम बच्चा जन्म नहीं लेगा बल्कि वह परमात्मा की भेजी हुई कोई महान हस्ती होगी, जो आपके पास 23 वर्षों तक रहेंगे और उसके बाद परमात्मा के हुक्म अनुसार अपने काम के लिए चले जाएंगे।

वही हुआ परमात्मा के हुक्मानुसार 15 अगस्त 1967 को आपजी के घर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने अवतार धारण किया। पूजनीय बापू जी ने सतगुरू हजूर पिता जी को बाल रूप से ही बेअंत प्रेम व प्यार दिया। जब पूज्य गुरू जी 10-12 वर्ष के थे तब भी पूजनीय बापू जी अपने लाडले को कन्धे पर बिठाकर चलते। आज के इस घोर कलियुग में लोग अपने सिर का बाल भी किसी को नहीं देते, लेकिन पूज्य बापू जी और पूज्य माता जी के इस त्याग का उदाहरण इतिहास के पन्नों पर नई इबारत के साथ दर्ज हो गया। विवाह के 18 वर्ष बाद प्राप्त हुई अपनी इकलौती सन्तान, जिसे बापू जी एक पल के लिए भी अपनी आंखों से ओझल नहीं होने देते थे, उन्होंने अपने सतगुरु दातार पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के एक इशारे पर मानवता को अर्पित कर दिया।

पूज्य परम पिता जी ने 23 सितम्बर 1990 को जब पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को पावन गुरगद्दी की बख्शीश की, तब पूजनीय बापू जी ने परम पिता जी से यही अर्ज की, कि हमारी जमीन-जायदाद भी ले लो, हमें तो डेरे में एक कमरा दे दो ताकि हम इनके (पूज्य गुरू जी) और आपजी के दर्शन करते रहें। पूजनीय बापू जी ने सदा सादगी भरा जीवन व्यतीत किया। पूज्य गुरू जी को गुरुगद्दी की बख्शीश के बाद कई बड़े लोग पूजनीय बापू जी को मिलने के लिए आते तो वे आप जी की सादगी व सरल स्वभाव को देखकर बहुत प्रभावित होते।

पूजनीय बापू जी दुनिया में रूहानियत, इन्सानियत और भाईचारे की रोशनी बिखरते हुए 5 अक्तूबर 2004 को कुल मालिक के चरणों में सचखंड जा विराजे। 10 अक्तूबर 2004 को पूज्य बापू जी की याद में श्रद्धांजलि स्वरूप श्रीगुरुसरमोडिया में रक्तदान कैंप लगाया गया, जिसमेें 17921 यूनिट रक्तदान हुआ जो गिनीज बुक आॅफ रिकार्ड्स में भी दर्ज हुआ। साध-संगत आपजी की पूण्यतिथि को मानवता भलाई के कार्य कर इसे परमार्थी दिवस के रूप में मनाती है। आज परमार्थी दिवस के उपलक्ष्य में शाह सतनाम जी स्पैशलिटी अस्पताल में रक्तदान शिविर लगाया जा रहा है। सच कहूँ टीम

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