सुखदुआ समाज ने कुछ यूं किया पूज्य गुरु जी का स्वागत

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  • ‘‘ लिखने वाले तू होके दयाल लिख दे, मेरे लेखां च सतगुरु दा प्यार लिख दे’’,
  • -गीत गाकर, नाचकर, मिठाइया बांटकर पूरे विश्व को दी बधाईयां

बेब डेस्क-विजय शर्मा
सरसा-हनुमानगढ़। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के शनिवार को शाह सतनाम जी आश्रम बरनावा, बड़ौत, बागपत, उत्तर प्रदेश में जैसे ही पावन चरण पड़े, चहुंओर ओर साध-संगत में खुशियों की बहारें छा गई। इस खुशी का इजहार राजस्थान के जिला हनुमानगढ़ में भी सुखदुआ समाज (किन्नर) के लोगों ने अनूठे ढंग से मनाया। सुखदुआ समाज ने गीत गाकर, नाचकर, मिठाइया बांटकर पूरे विश्व को बधाईयां देते हुए अपने मुर्शिद-ए-कामिल के आने पर खुशियां मनाई। सुखदुआ समाज के लोगों ने एक गीत के माध्यम से अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि ‘‘ लिखने वाले तू होके दयाल लिख दे, मेरे लेखां च सतगुरु दा प्यार लिख दे’…इस गीत पर सुखदुआ समाज के लोगों ने नाचते हुए दोनों जहान के मालिक सतगुरु दाता का दर्शन देने के लिए शुकराना किया।

हम धन्य हैं कि डॉ. एमएसजी हमारे गुरु हैं: सुखदुआ समाज

इस मौके पर सुखदुआ समाज के लोगों ने कहा कि आज अगर हम सम्मान जनक जीवन जी रहे हैं तो इस का श्रेय सिर्फ पूज्य गुरु जी को जाता है। अपमानित व उपेक्षित जिन्दगी से छुटकारा दिलाने के लिए पूज्य गुरु जी ने हमारा इस कलयुग में उद्धार किया है। उन्होंने कहा कि पूज्य गुरु जी ने अनोखी पहल ही नहीं की बल्कि उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ कर उन्हें इज्जत भरी जिंदगी जीने के काबिल भी बनाया है। आज हमें गर्व है कि हम पूज्य गुरु जी के शिष्य हैं।

पूज्य गुरु जी ने दिया ‘सुखदुआ’ समाज का नाम

डेरा सच्चा सौदा द्वारा मानवता भलाई के 142 कार्य किए जा रहे हैं, जिनमें से एक किन्नरों की दयनीय दशा सुधारने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य है। डॉ. एमएसजी ने 14 नवंबर 2009 को एक ऐतिहासिक मुहिम का ऐलान किया था। इस मुहिम के अंतर्गत किन्नरों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए किन्नरों को सबसे पहले ‘सुखदुआ’ समाज का नाम दिया। पूज्य गुरु जी इस अनूठी मुहिम से आज समाज के लोग इन्हे किन्नर नहीं बल्कि ‘सुखदुआ’ कहकर बुलाते हैं।

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