सोशल डिस्टैंसिंग के दोहरे मापदंड

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यह काफी पेचीदा है कि जब एक ही देश में एक ही कानून विभिन्न व्यक्तियों पर अलग-अलग तरीके से लागू किया जा रहा है। ये सब कोरोना महामारी के दौर में घटित हो रहा है, जहां विदेश में फंसे भारतीयों को वापिस लाने हेतु हवाई उड़ानें शुरू करने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप पुरी ने कहा कि अब लोगों के यात्रा करने के नियम-तरीकों में बदलाव आएगा और सोशल डिस्टेंसिंग का कड़ाई से पालन करना होगा। मंत्री का तर्क था कि नियमों की पालना के कारण हवाई यात्रा के किराये में वृद्धि होगी, हालांकि सरकार किराया तो नहीं बढ़ाना चाहती लेकिन महामारी के दौर में सरकार स्वास्थ्य की अनदेखी में भी कोई कसर नहीं छोड़ रही। शायद सरकार का यह मानना है कि कोरोना एक बुद्धिमान वायरस है जो विमान में सोशल डिस्टेंसिंग नहीं रखने पर भी यात्रियों को संक्रमित नहीं करेगा।
किंतु वास्तविक्ता यह है कि जितना खतरा कोरोना से बस यात्रियों को है, उतना ही हवाई यात्रियों को भी है। हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले पर तुरंत संज्ञान लिया। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि सरकार विमान कंपनियों की बजाए लोगों के स्वास्थ्य की चिंता करे। इस संकट के दौर में वाजिब किराये के साथ सोशल डिस्टैंसिंग भी जरूरी है। लॉकडाउन व दूरी का यही कारण है कि इससे वायरस की कड़ी टूटेगी। अब 52 सीटों वाली बस में 20 यात्री ही यात्रा कर सकेंगे, तब यही नियम हवाई यात्रा में भी लागू होना चाहिए। यहां किराये को कम करने के लिए मानवीय जीवन दांव पर नहीं लगाया जाना चाहिए। सरकार ने न्यायलय में तर्क दिया है कि सीट खाली छोड़ने की हिदायत घरेलू उड़ानों में लागू की गई है। विदेशों से भारतीय लोगों को लाने के लिए अभी सारी सीटें भरनी पड़ेंगी।
यह तर्क हास्यस्पद है कि देश में चल रहे विमान में सोशल डिस्टेंसिंग अनिवार्य है व विदेश से आने वाले विमानों में डिस्टेंसिंग की आवश्यकता नहीं है। मंत्री का यह तर्क चिकित्सा विज्ञान की कसौटी पर बेतुका साबित होता है। इसमें केंद्र व राज्य सरकारों की उन अपीलों का कोई औचित्य नहीं रह जाता जिनमें आम लोगों को बाजार, अस्पतालों व अन्य स्थानों पर जाते समय और आपसी दूरी को बनाए रखना कोरोना से बचने का मूल मंत्र बता रहीं हैं। पिछले दिनों जब दिल्ली व मुंबई के रेलवे स्टेशनों पर मजदूरों की भीड़ हुई थी तब सरकार को हाथ-पैरों की पड़ गई थी लेकिन अब यही भीड़ विमानों में होगी जहां यात्री ठूस-ठूंसकर भरे होंगे तब फिर देश को कोरोना से कौन बचाएगा।

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