पारंपरिक रंग से मुक्त नहीं हो सके लोकसभा चुनाव

Published On

लोकसभा चुनाव एक बड़ा लोकतांत्रिक त्यौहार है व 17वीं लोकसभा का चुनाव अंतिम चरणों में पहुंच चुका है, लेकिन 70 सालों के बाद भी राजनीति में कोई सकारात्मक परिवर्तन नहीं हुए। चुनावों के दौरान नेता जिस प्रकार के वायदे करते हैं वोटर उससे प्रभावित होता है व विकास की उम्मीद करता है लेकिन वास्तविक्ता बिल्कुल विपरीत देखी जा रही है, जिससे वोटर खुद को ठगा हुआ महसूस करता है। 2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा की बजाए जनता ने नरेन्द्र मोदी को बिना किसी भेदभाव के वोट देकर पीएम बनाया। इन चुनावों में भाजपा की शानदार विजय हुई। राजनीतिक पंडितों ने इस जीत को भाजपा की बजाए मोदी की जीत करार दिया। विदेशी मीडिया ने भी मोदी को अंतराष्टय स्तर पर पीएम मोदी को ताकतवार व्यक्ति व पर्सनेल्टी आफ द ईयर के अवॉर्ड भी दिए, अब वही मीडिया प्रधानमंत्री पर सवाल उठा रहा है। मोदी सरकार से जनता को जिस प्रकार की उम्मीद बंधी थी, वास्तविक्ता में सरकार मैनीफेस्टों में किए वायदों को पूरा नहीं कर सकी। देश में धर्म, जाति के नाम पर दंगे व हिंसा बढ़ी है। वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों के कार्यालय में भ्रष्टाचार बंद हुआ तो निम्न स्तर पर जनता को भ्रष्टाचार से मुक्ति नहीं मिल सकी। 2014 के चुनावी मैनीफेस्टों में कालाधन वापिस लाने का वायदे के तहत की गई नोटबंदी भी अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकी।

विशेषतौर पर न्यायपालिका व सीबीआई में सरकारी दखल के आरोप भी लगे। देश एक बार फिर दुविधा से गुजर रहा है। इतना बड़ा बहुमत मिलने के बावजूद पार्टी अपने वायदों को पूरा करने में नाकाम साबित हुई, क्यों नाकाम हुई? जनता के मन में यह एक बड़ा सवाल है। चुनावी प्रचार के लिए मीडिया को खरीदने व धमकाने के आरोप लग रहे हैं। चुनावी प्रचार में मीडिया को गोदी मीडिया कहा जा रहा है। पार्टियों की रैलियां धड़ाधड़ हो रही हैं, लेकिन कोई भी नेता जनता का ध्यान आकर्षित करने में सफल नहीं हुआ। आखिर भाजपा का अभिनेता, खिलाड़ियों के माध्यम से जनता को प्रभावित करने का पैंतरा भी कोई ज्यादा रंग नहीं दिखा रहा। नेताओं के भाषणों पर अब जनता को विश्वास नहीं हो रहा। धर्मों के नाम पर भड़काने वाले भाषणों को जनता केवल राजनीतिक लाभ कह रही है। किसानों की आत्महत्याएं, बेरोजगारी व अन्य मामले ज्यों के त्यों जारी हंै। लोग नेताओं के भाषणों के जादू से विकास की उम्मीद नहीं कर रहे। इस बार वोटर जागरूक है व पूरा राजनीतिक माहौल देखकर ही वोट के अधिकार का प्रयोग कर रहा है।

Hindi News से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।

About The Author

Related Posts