कोरोना विरुद्ध ड्यूटी कर रहे कर्मवीरों के स्वास्थ्य का रखें ध्यान

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देश में कोरोना महामारी से निपटने के लिए केंद्र व राज्य सरकारें जुटी हुई हैं। डॉक्टरों, पुलिस व सफाई कर्मचारियों का जज्बा काबिले-ए-तारीफ है जो लोगों की जान बचाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, इसकी बदौलत ही इन्हें कोरोना योद्धा का नाम दिया गया है। इसके साथ ही कोरोना योद्धाओं का स्वास्थ्य भी देश के लिए सुरक्षा का मुद्दा है। यदि ये योद्धा स्वस्थ रहेंगे फिर ही वे लोगों को कोरोना से बचा सकेंगे। कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं जहां भावुकतावश मेडिकल गाइडलाइन को अनदेखा किया गया। विशेष रूप से पुलिस कर्मचारी कुछ बच्चों के जन्मदिन के अवसर पर उनके घर में केक देकर आए। बच्चों के प्रति पुलिस कर्मचारियों का स्नेह व भावना सराहनीय है लेकिन महामारी के दौर में इस प्रकार का संपर्क किसी खतरे से भी खाली नहीं।
लोगों को चाहिए कि वे जन्मदिन पर बच्चों की बाजार में बने केक मंगवाने की जिद्द पूरी करने से परहेज करें क्योंकि बच्चों की जिद्द पुलिस कर्मचारियों को संकट में डाल सकती है। केक बनाने वाला या पैक करने वाला खुद सुरक्षित है या नहीं? इसकी कोई गारंटी नहीं। केक के द्वारा कोरोना पुलिस व बच्चों के परिवार तक पहुंचा सकता है इसीलिए परिवारिक सदस्य पुलिस को केक लाने के लिए मजबूर न करें बल्कि घर में कोई व्यंजन तैयार कर बच्चों को खिलाएं। घर में बनाई वस्तु का अलग ही स्वाद होता है। पुलिस के अलावा कुछ नेताओं द्वारा भीड़ इक्ट्ठी कर सैनेटाईजर बांटने की तस्वीरें भी सामने आई हैं जो खतरे की घंटी है। यदि कोई राजनीतिक पार्टी जनता की सेवा करना चाहती है तब वह इक्ट्ठ करने की बजाय जरूरतमन्द व्यक्तियों को निजी तौर पर सामान वितरित करें ताकि आपसी दूरी को कायम रखा जा सके। इससे भी बेहतर यह है कि यदि बड़े नेता पीछे रहकर ही काम करें, क्योंकि इन नेताओं के साथ भीड़ इकट्ठी होना स्वाभाविक है और फिर नेताओं की सुरक्षा का भी मामला होता है। राजनीतिक ठसक का त्याग कर मानवता की सेवा की जाए तो समाज सुरक्षित रह सकता है। आमजन को भी चाहिए कि वह देश सेवा में लगे अधिकारियों-कर्मचारियों के स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखें।
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