कविता : एक कहूँ एक, दो कहूँ दुआ

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एक कहूँ एक, दो कहूँ दुआ,
रटवाती थी हमको बुआ।

टू वन जा टू, टूटू जा फोर,
लगता यारों कितना बोर।

क से कबूतर, ख से खरगोश,
पढ़कर हुआ गुड्डू बेहोश।

ए फॉर एप्पल, बी फॉर बैट,
मोटू नहीं सन्नी बोलो फैट।

उतरी हिन्दी की पगड़ी,
पहनी हमने अंग्रेजी तगड़ी।

डॉ. श्याम सखा ‘श्याम’

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