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Tuesday, March 17, 2026
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    कविता : एक कहूँ एक, दो कहूँ दुआ

    एक कहूँ एक, दो कहूँ दुआ,
    रटवाती थी हमको बुआ।

    टू वन जा टू, टूटू जा फोर,
    लगता यारों कितना बोर।

    क से कबूतर, ख से खरगोश,
    पढ़कर हुआ गुड्डू बेहोश।

    ए फॉर एप्पल, बी फॉर बैट,
    मोटू नहीं सन्नी बोलो फैट।

    उतरी हिन्दी की पगड़ी,
    पहनी हमने अंग्रेजी तगड़ी।

    डॉ. श्याम सखा ‘श्याम’

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