अब घर पर बैठकर देखें रामायण, सुधारे बच्चों का चरित्र

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डीडी नेशनल पर सुबह और रात 9 बजे प्रसारण शुरू | Watch Ramayana

गुरुग्राम(संजय मेहरा/सच कहूँ )। 70-80 के दशक और उससे पहले जन्में लोग यह भली-भांति जानते हैं कि 80 के दशक में शुरू हुई रामानंद सागर कृत रामायण उनके जीवन के लिए कितनी जरूरी थी। रामायण को लोगों ने सिर्फ छोटे पर्दे यानी टेलिविजन पर मनोरंजन का साधन नहीं माना था, बल्कि उसे सीधे भगवान से जोड़कर देखा। रामायण में राम का किरदार निभाने वाले कलाकार अरुण गोविल को लोग श्रद्धा भाव से देखते थे।

एक वक्त पर धारावाहिक चलने पर सूनी हो जाती थी सड़कें

  • तब रामायण देखने के दौरान कोई घरों से बाहर नजर नहीं आता था।
  • एक तरह से कर्फ्यू जैसा माहौल हो जाता था।
  • वहीं आज कर्फ्यू जैसे लॉकडाउन के माहौल में रामायण शुरू की गई है।
  • इसकी बड़ी और मुख्य वजह कोरोना वायरस ही है।
  • सरकार द्वारा देशभर में लॉकडाउन किया हुआ है।

लोगों को इस वायरस के फैलने से रोकने को सोशल डिस्टेंस बनाने के लिए घरों में ही रहना जरूरी कर दिया गया है। वैसे तो आज हमारे पास मनोरंजन के इतने साधन हैं कि घर में बोर नहीं हो सकते। हर व्यक्ति एंडरॉयड मोबाइल फोन रखता है। टेलिविजन पर सैकड़ों चैनल्स पर लगातार कार्यक्रम प्रसारित हो रहे हैं। फिर भी सरकार ने रामायण धारावाहिक प्रसारित करने का निर्णय लिया और शनिवार 28 मार्च 2020 से वह सुबह-शाम नौ बजे से शुरू भी हो गया।

अपनी भावी पीढ़ी को रामायण से दें संस्कार

वर्ष 1987-88 में रामायण के लिए लोग सप्ताहभर तक उत्सुक रहते थे। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक (पुरुष-महिलाएं) एक छत के नीचे बैठकर बेहद ही शांत माहौल के बीच रामायण देखते थे। एक तरह से रामायण संस्कारों की पाठशाला भी थी। हर चरित्र, किरदार हमें कुछ न कुछ संस्कार देता था। अब 21वीं सदी में फिर से रामायण का दौर लौटा है। बेशक कोरोना वायरस के बहाने रामायण को प्रसारित करने का निर्णय लिया गया, लेकिन इससे भी हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। हम अपनी भावी पीढ़ी में संस्कारों का समावेश रामायण के माध्यम से कर सकते हैं। हम उन्हें एक-एक पात्र का चरित्र बताकर उनके जैसा बनने या ना बनने का संदेश दे सकते हैं।

  • यह बात हम इसलिए कह रहे हैं कि इसमें पॉजिटिव के साथ नेगेटिव किरदार भी तो हैं।
  • कोई भी व्यक्ति अपनी संतान को राम जैसा चरित्रवान बनाना चाहेगा।
  • नेकी, सच्चाई, एकता, भाईचारे की भावना राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न से सीखी जा सकती है।

जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घरों की दहलीज रूपी लक्ष्मण रेखा पार न करने की बात कही है, वह सही है। रामायण में भी दिखेगी कि लक्ष्मण रेखा पार करने से कितनी मुसीबतें आती हैं।

 

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