यहां फव्वारों से नहा रहे शेर, लंगूर खा रहे तरबूज-खीरा लेकिन...

 शेरों को पानी की बौछारों तो कहीं कूलरों के सहारे गर्मी से दिलाई जा रही राहत 

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कुरुक्षेत्र (सच कहूँ/देवीलाल बारना)। गर्मी अपना पूरा असर दिखा रही है। दोपहर के समय चिलचिलाती धूप और गर्म हवाओं के कारण घर से निकलना भी मुश्किल हो रहा है। गर्मी के चलते चिड़िया घर में जानवरों को विशेष सुविधा दी जा रही है। जानवरों पर कहीं पानी बौछारों से गर्मी को कम करने का प्रयास किया जा रहा है, कहीं कूलरों के माध्यम से गर्मी से राहत दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।

वहीं जानवरों की डाइट भी मौसम के हिसाब से बदल दी गई है। भीषण गर्मी का असर चिड़ियाघर में आने वाले पर्यटकों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। सामान्य दिनों में जहां हर रोज 700 से 1 हजार लोग पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर 200 से 250 तक रह गई है। पिपली स्थित चिड़िया घर (Pipli Zoo) में शेर-शेरनी साक्षी और शिवा के साथ पेंथर रीना और रवि को गर्मी से बचाने के लिए लगातार पानी के फव्वारे चलाए जा रहे हैं।

इनके बाड़ों के आसपास कूलर लगाए गए हैं ताकि तापमान कम रखा जा सके। हाइना समेत दूसरे जानवरों के लिए भी ठंडे माहौल की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा भी अन्य प्रयास किया जा रहे हैं, ताकि गर्मी को कम किसर जा सके। जानवरों के बाड़ों के ऊपर एग्रोनेट लगाई गई है ताकि सीधी धूप अंदर न पहुंचे। 

रोजाना बदला जा रहा तालाबों का पानी 

चिड़िया घर में पानी वाले जानवरों के लिए रोजाना तालाबों का पानी बदला जा रहा है। ताकि जानवर पानी पीने के साथ उसमें बैठकर गर्मी से राहत ले सकें। दोपहर के समय जानवर अपने बाड़े के अंदर ही रहते हैं। गर्मी बढ़ने के साथ जानवरों के खानपान में भी बदलाव किया गया है, ताकि किसी भी जानवर की तबीयत पर असर न पड़े। गर्मी से राहत देने के लिए जानवरों के खाने में बदलाव किया गया है। लंगूरों और पक्षियों को तरबूज और खीरा दिया जा रहा है ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। सांभर और काले हिरणों की डाइट में मिक्स मिनरल शामिल किया गया है।

14 प्रजातियों के 74 जानवर बढ़ा रहे चिड़िया घर की शोभा 

वन्य प्राणी विभाग के इंचार्ज देवेंद्र कुमार ने बताया कि पिपली चिड़िया घर में इस समय 14 प्रजातियों के कुल 74 जानवर हैं। इनमें 31 नर और 31 मादा जानवर शामिल हैं, जबकि 12 बच्चे भी हैं। जू में शेर, पेंथर, हाइना, गीदड़, मगरमच्छ, घड़ियाल, जंगली मुर्गा, क्लीज, सांभर, काला हिरण, मोर, तीतर, दरियाई घोड़ा और लंगूर जैसे कई वन्य जीव मौजूद हैं। देवेंद्र के अनुसार जानवरों और पक्षियों के लिए हर जरूरी इंतजाम किए गए हैं। पेड़ों पर पानी से भरे सकोरे बांधे गए हैं और उनका पानी लगातार बदला जाता है। 

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