पद्मश्री और अर्जुन अवार्डी कौर सिंह ने वापिस किए अपने अवार्ड

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कृषि आंदोलन : कृषि कानूनों के खिलाफ देश के ‘लाडले’ का भारी रोष

  • 3 बार एशिया चैंपियन, लगातार 7 साल नेशनल चैंपियन रहे कौर सिंह
  •  किसान का पुत्र होने का फर्ज निभाया: कौर सिंह

सच कहूँ/गुरप्रीत सिंह  संगरूर। जिला संगरूर के गांव खनाल खुर्द में रह रहे भारत के ‘सरमाया’ मुक्केबाज कौर सिंह ने खेती कानूनों के खिलाफ केंद्र सरकार की ओर से मिले अवार्डों पद्म श्री व अर्जुन अवार्ड को वापिस कर दिया है। मुक्केबाजी के खेल में कई सालों तक भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले जिला संगरूर के गांव खनाल खुर्द के निवासी कौर सिंह ने किसान का पुत्र होने का फर्ज निभाते हुए देशों-विदेशों में हासिल की अपनी, उपलब्धियों के बदले केंद्र सरकार की ओर से मिले अवार्डों को वापिस कर दिया है।

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कौर सिंह ने ‘सच-कहूँ’ प्रतिनिधि के साथ विशेष तौर पर बातचीत दौरान खेती के नये तीन कानूनों की जबरदस्त आलोचना करते कहा कि केंद्र की ओर से लाए गए यह कानून किसानों के लिए बर्बादी का रास्ता खोल देंगे। पंजाब के किसानों की हालत बिहार के लोगों जैसी हो जायेगी और पंजाबियों को दिहाड़ी करने दूर दराज के राज्यों में जाना पड़ेगा, जिस संबंधी सोच कर भी डर लगता है।

उन्होंने जोरदार ढंग से केंद्र सरकार से मांग की कि जितना जल्दी हो सके सरकार इन कानूनों को वापिस ले और दिल्ली में 15 दिनों से धरना दे रहे किसानों की हर मांग स्वीकृत हो। कौर सिंह ने पत्रकारों से बातचीत करते कहा कि बेशक उसके पूरे जीवन में अपनी दिल से खेले खेल मुक्केबाजी से केंद्र सरकार की तरफ से उनको केंद्र सरकार की ओर से अर्जुन अवार्ड और पद्म श्री जैसे अवार्ड से सम्मानित किया गया था, परन्तु आज केंद्र सरकार की ओर से जो कानून पास किये गए हैं, वह किसानी को तबाह करने वाले हैं।

यह सब कुछ वह अपनी, आंखों के सामने होता नहीं देख सकते और किसान का पुत्र होने के नाते उन्होंने सरकार को यह अवार्ड वापिस कर दिए हैं। कोर सिंह ने कहा कि उनका पूरा जीवन खेल उपलब्धियों से भरा हुआ है। केंद्र सरकार के खेती प्रति अपनाए गए इस कुसैले रवैये के कारण जीवन के अंतिम वाले मोड़ पर उनको यह सब कुछ देखना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों से जालंधर में पहलवान करतार सिंह के नेतृत्व में जिन्होंने सरकार को अपने मैडल वापिस किये हैं, उनमें भी मेरा नाम शामिल है।

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