Dussehra: दशहरा पर पूज्य गुरु जी के वचन

दशहरा पर पूज्य गुरु जी के वचन

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Dussehra: सरसा। दशहरा का पावन पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में सत्य, प्रेम, विनम्रता और सदाचार के मार्ग पर चलते हुए बुराइयों का त्याग करना चाहिए। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की शिक्षाएं भी इंसान को अपनी कमियों को दूर करने और मानवता की भलाई के कार्यों के लिए प्रेरित करती हैं।

केवल रावण का पुतला जलाना ही नहीं, बुराइयों का त्याग भी जरूरी

पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि दशहरा हमें भगवान श्रीराम की विजय और रावण के अंत की याद दिलाता है। इस पर्व का वास्तविक संदेश तभी सार्थक होता है, जब इंसान अपने भीतर मौजूद बुराइयों को पहचानकर उन्हें दूर करने का संकल्प ले। क्रोध, अहंकार, लालच, ईर्ष्या, मोह और नशे जैसी बुराइयां इंसान के जीवन को प्रभावित करती हैं। ऐसे में केवल रावण का पुतला जलाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि अपने मन में छिपी इन कमियों को खत्म करने का प्रयास करना भी जरूरी है। व्यक्ति को अपने व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने, दूसरों के प्रति सम्मान रखने और सच्चाई के मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए। जब इंसान अपने अंदर की बुराइयों पर विजय प्राप्त करता है, तभी दशहरे का संदेश उसके जीवन में वास्तविक रूप से उतरता है।

मानवता की सेवा से मिलती है सच्ची खुशी

मानवता की सेवा भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण परंपरा रही है। जरूरतमंदों की सहायता करना, भूखों को भोजन उपलब्ध करवाना, बेसहारा लोगों का सहारा बनना और दुखी इंसान के चेहरे पर मुस्कान लाना ऐसे कार्य हैं, जो समाज में प्रेम और भाईचारे को मजबूत बनाते हैं। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की शिक्षाओं से प्रेरित होकर साध-संगत मानवता भलाई के कार्यों में योगदान देने का प्रयास करती है। जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र उपलब्ध करवाना तथा असहाय लोगों की मदद करना सेवा भावना के ऐसे उदाहरण हैं, जिनसे समाज में सकारात्मकता का संदेश पहुंचता है।

अच्छाई अपनाने का लें संकल्प

पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि दशहरे का पर्व हमें यह संकल्प लेने की प्रेरणा देता है कि हम किसी के प्रति द्वेष नहीं रखेंगे, बुरी आदतों से दूर रहेंगे और जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे। परिवार, समाज और देश की उन्नति के लिए जरूरी है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्यों को समझे और अच्छे आचरण को जीवन का हिस्सा बनाए।

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