Mahaknoor Insan Lacrosse: ऑस्ट्रेलिया में दम दिखाकर लौटीं जीएफबी महकनूर इन्सां, अब ओलंपिक में गोल्ड जीतने का सपना
भारतीय टीम की वाइस कैप्टन बनकर संभाला मिडफील्डर और डिफेंडर का मोर्चा, सिंगापुर को 15-4 से हराया
Asia Pacific Sixes Lacrosse Championship: सरसा, (सच कहूँ/सुनील वर्मा)। ऑस्ट्रेलिया में एशिया-पैसिफिक सिक्सेस लैक्रोस चैंपियनशिप एवं ओलंपिक क्वालीफायर में हिस्सा लेकर लौटीं शाह सतनाम जी गर्ल्स स्कूल की 11वीं कक्षा की जीएफबी महकनूर इन्सां का लक्ष्य अब ओलंपिक में तिरंगा लहराना और देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है। भारतीय टीम की वाइस कैप्टन रहीं महकनूर का मंगलवार को स्कूल पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। इस प्रतियोगिता में हरियाणा की ओर से केवल दो खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया, जिनमें महकनूर भी शामिल थीं।
स्कूल के मुख्य द्वार पर प्राचार्या डॉ. शीला पूनियां इन्सां, उपप्राचार्या सीमा छाबड़ा इन्सां, कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. गीता मोंगा इन्सां, डॉ. रिशू तौमर इन्सां, प्रशिक्षक मंजू टोहाना इन्सां और अन्य स्टाफ सदस्यों ने फूलमालाएं पहनाकर उनका स्वागत किया। इसके बाद बैंड की धुनों और छात्राओं की तालियों के बीच उन्हें स्कूल प्रांगण तक लाया गया, जहां सैकड़ों छात्राओं की मौजूदगी में सम्मानित किया गया।
तीन साल के अभ्यास से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचीं महकनूर
महकनूर ने चैंपियनशिप में भारतीय टीम की वाइस कैप्टन के रूप में मिडफील्डर और डिफेंडर की भूमिका निभाई। उन्होंने स्कूल प्रांगण में मौजूद सैकड़ों छात्राओं को बताया कि भारत में लैक्रोस खेल की शुरूआत करीब पांच साल पहले हुई थी, जबकि उन्हें इस खेल से जुड़े अभी तीन साल ही हुए हैं। इसके बावजूद लगातार अभ्यास और पूज्य गुरु जी के मार्गदर्शन से वह अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने में सफल रहीं। प्रतियोगिता में भारतीय टीम ने सिंगापुर को 15-4 से हराया।

महकनूर ने बताया कि चैंपियनशिप का अनुभव काफी अच्छा रहा। दूसरे देशों के खिलाड़ी लंबे समय से यह खेल खेल रहे हैं और उनके पास काफी अनुभव है। वहां के खिलाड़ी उम्र में भी उनसे बड़े थे। इसके बावजूद पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के आशीर्वाद और उनके द्वारा बताई गई डिफेंसिंग तकनीकों को अपनाकर टीम ने बेहतर प्रदर्शन किया। महकनूर ने कहा पूज्य गुरु जी मेरे पिता हैं और पापा ही मेरे कोच हैं। उनकी बदौलत ही मैं इस खेल में हिस्सा ले पाई हूं। आॅस्ट्रेलिया में खेलना मेरा पहला पड़ाव है। अब दूसरा लक्ष्य ओलंपिक में खेलकर देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है, ताकि देश और पापा कोच का नाम रोशन कर सकूं।
तीन साल की मेहनत से भारतीय टीम में बनाई जगह, जीएफबी महकनूर बनीं प्रेरणा
विद्यालय की प्राचार्या डॉ. शीला पूनियां इन्सां ने महकनूर को बधाई देते हुए कहा कि शाह सतनाम जी गर्ल्स स्कूल में लैक्रोस खेल की शुरूआत तीन साल पहले हुई थी। तीन साल की मेहनत और तपस्या के बाद महकनूर भारतीय टीम में जगह बनाने में सफल हुईं और अपना पहला अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेलकर लौटी हैं।

उन्होंने बताया कि भारतीय टीम में हरियाणा की दो खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया, जिनमें शाह सतनाम जी गर्ल्स स्कूल की जीएफबी महकनूर इन्सां भी शामिल हैं। यह विद्यालय के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि महकनूर ने जो मुकाम हासिल किया है, उसका श्रेय पूज्य गुरु जी को जाता है। उन्हें पूरा विश्वास है कि महकनूर एक दिन ओलंपिक में हिस्सा लेकर पदक जीतेंगी और देश का नाम रोशन करेंगी।
कौन होती हैं जीएफबी? 21 बेटियों को मिला पिता का प्यार और सहारा
महकनूर इन्सां जीएफबी यानी गुरु फादर बेटी हैं। जिन्हें डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु जी ने गोद लेकर उनके पालन-पोषण, शिक्षा और खेल संबंधी खर्च की जिम्मेदारी उठाई तथा माता-पिता के रूप में अपना नाम दिया। ऐसी बेटियों को बेहतर भविष्य देने के उद्देश्य से कुल 21 बेटियों को गोद लिया गया था। इनमें से 13 बेटियों की शिक्षा पूरी होने के बाद अच्छे परिवारों में शादी की जा चुकी है, जबकि आठ बेटियां अभी शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय खेल मंच तक पहुंचीं जीएफबी महकनूर इन्सां की उपलब्धि अन्य छात्राओं के लिए भी प्रेरणादायक है। विद्यालय परिवार ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उम्मीद जताई कि वह आगे भी अपनी खेल प्रतिभा के दम पर विद्यालय, हरियाणा और देश का नाम रोशन करेंगी।