Rajasthan Education News: परीक्षा के दिन ही शैक्षिक सम्मेलन, शिक्षक जाएंगे तो परीक्षा कौन कराएगा?

परीक्षा कार्यक्रम और शिविरा पंचांग की तारीखों में टकराव, शिक्षक असमंजस में

Published On

जयपुर (सच कहूँ/गुरजंट धालीवाल)। शिक्षा विभाग के परीक्षा कार्यक्रम और शिविरा पंचांग में आपसी समन्वय की कमी अब सवालों के घेरे में है। नए शेड्यूल के अनुसार प्रदेश के स्कूलों में 25 नवंबर से 7 दिसंबर तक अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं आयोजित होनी हैं। इसी बीच शिविरा पंचांग के अनुसार 27 और 28 नवंबर को राज्यस्तरीय शैक्षिक सम्मेलन प्रस्तावित है। खास बात यह है कि 27 नवंबर को विज्ञान और 28 नवंबर को सामाजिक विज्ञान की परीक्षा निर्धारित है। ऐसे में सवाल उठता है कि परीक्षा ड्यूटी के बीच शिक्षक सम्मेलन में कैसे शामिल होंगे और यदि शिक्षक सम्मेलन में जाएंगे तो स्कूलों में परीक्षा व्यवस्था कैसे संचालित होगी?

एक ही तारीख पर दो महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां

अर्द्धवार्षिक परीक्षा स्कूलों की प्रमुख शैक्षणिक गतिविधियों में शामिल है। वहीं, राज्यस्तरीय शैक्षिक सम्मेलन में शिक्षकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। लेकिन दोनों कार्यक्रमों की तारीखें एक ही होने से शिक्षकों के सामने असमंजस की स्थिति बन गई है। 27 नवंबर को विज्ञान और अगले दिन सामाजिक विज्ञान की परीक्षा के दौरान शिक्षकों की उपलब्धता और परीक्षा संचालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सवाल यह है कि जब शिविरा पंचांग में राज्यस्तरीय शैक्षिक सम्मेलन की तारीखें निर्धारित थीं, तो अर्द्धवार्षिक परीक्षा का नया शेड्यूल तैयार करते समय इसका ध्यान क्यों नहीं रखा गया? क्या परीक्षा कार्यक्रम जारी करने से पहले विभागीय स्तर पर कैलेंडर का समन्वय नहीं किया गया? यदि दोनों आयोजन पूर्व निर्धारित थे, तो तारीखों के टकराव की स्थिति बनने से पहले समाधान क्यों नहीं निकाला गया?

शिक्षक करें तो क्या करें?

एक ओर विद्यार्थियों की परीक्षा संपन्न कराने की जिम्मेदारी है, दूसरी ओर राज्यस्तरीय सम्मेलन में भागीदारी का सवाल। ऐसे में शिक्षकों के सामने असमंजस है कि वे विद्यालय की परीक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दें या सम्मेलन में शामिल हों। इस स्थिति में परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी, शिक्षकों की उपस्थिति और सम्मेलन में सहभागिता को लेकर विभागीय दिशा-निर्देश जरूरी हो जाते हैं।

परीक्षा और सम्मेलन की तारीखों में टकराव के बीच अब शिक्षा विभाग के निर्णय पर नजर है। विभाग परीक्षा कार्यक्रम में संशोधन करेगा या सम्मेलन की तारीखों में बदलाव होगा, इस पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। समय रहते निर्णय नहीं हुआ तो अंतिम समय में स्कूलों और शिक्षकों को व्यवस्थागत परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

सवाल यही है कि जब परीक्षा और सम्मेलन दोनों विभागीय शैक्षिक कैलेंडर का हिस्सा हैं, तो इनके बीच तालमेल की जिम्मेदारी किसकी है? इस संबंध में प्राथमिक अध्यापक संघ (लेवल प्रथम), राजस्थान ने शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजकर राज्यस्तरीय शैक्षिक सम्मेलन की तिथियों में बदलाव करने तथा संशोधित कार्यक्रम शीघ्र घोषित करने की मांग की है।

प्रदेश सभाध्यक्ष खेमराज मीणा ने बताया कि परीक्षा और सम्मेलन एक ही तिथि पर होने से शिक्षकों के सामने दोनों कार्यक्रमों में सहभागिता को लेकर असमंजस की स्थिति बन सकती है। संगठन ने मांग की है कि सम्मेलन की नई तिथियां निर्धारित कर समय रहते घोषित की जाएं, ताकि विद्यालयों में परीक्षा संचालन प्रभावित न हो और शिक्षक भी सम्मेलन में भाग ले सकें।

About The Author

Related Posts