Anmol Vachan: अग्गे नूं वधाके पैर पिछ्छे नूं हटौणा की, बणके प्रेमी फिर दिल नूं डुलौणा की!

सब जीवों से प्रेम करो, गर मालिक को पाना है: पूज्य गुुरु जी

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पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि ‘सब जीवों से प्रेम करो, 'गर मालिक को पाना है। सब जीवों के दिल अंदर मालिक का ठिकाना है।’ तो आपने सबसे बेगर्ज, नि:स्वार्थ भावना से प्यार करना है, दृढ़ यकीन रखना है। इस रूहानियत के रास्ते पे अगर आप दृढ़ यकीन के साथ चलेंगे, तभी दृढ़ता से चल पाएंगे। वरना रोकने वाले रोकते हैं, टोकने वाले टोकते हैं। लेकिन आप किसी की परवाह न करें और आप प्यार-मोहब्बत के मार्ग पे ‘अग्गे नूं वधाके पैर पिछ्छे नूं हटौणा की, बणके प्रेमी फिर दिल नूं डुलौणा की।’

आप जी ने फरमाया कि आप वचनों पर रहकर आगे बढ़ते जाएं, तो यकीनन आपको मंजिल मिलेगी और मंजिल एक ही होनी चाहिए कि सतगुरु, अल्लाह, वाहेगुरु, राम को पाना और उसे पाया जा सकता है। इसके लिए आप सतगुरु, दाता, रहबर के पाक-पवित्र वचनों को माना करो, तो वो बुल्ले शाह जी वाली बात हो सकती है, ‘कख्ख ओल्ले लख्ख है पया।’ कि कुछ पता नहीं चलेगा कि कब मालिक खुशियों से लबरेज कर देंगे, कब मालामाल कर देंगे और अंदर-बाहर से भर देंगे। 

आप जी ने फरमाया कि सतगुरु, मालिक पर दृढ़ यकीन रखना जरूरी है। क्योंकि इन्सान के अंदर तरह-तरह के विचार उठते रहते हैं। आपके अंदर जैसे भी विचार चलते हैं, अच्छे विचार चलते हैं, तो परवाह करो और बुरे विचार चलते हैं तो उसकी परवाह न करो। अगर आप बुरे विचारों की परवाह करने लग गए, तो आप टेंशन में चले जाओगे, और मन के यही हथियार हैं। मन कहता है कि इस इन्सान को बुरे कामों में लगा दूं! बुरा काम हो गया, इन्सान कोई गलती कर बैठा, फिर मन कहता है कि अब तू बख्शा नहीं जाएगा! सतगुरु-मौला बख्श भी दें, फिर मन कहता है कि यार, वो पहले वाली बात नहीं बनेगी! जरा सोचो कि क्यों बात नहीं बनेगी? क्योंकि जब भगवान बख्श देते हैं, तो राक्षस भी देवता बन जाते हैं। भगवान ही क्यों, कोई संत, पीर-फकीर मालिक को हाजिर-नाजिर मानकर बख्श देते हैं, तो भी भगवान इन्कार नहीं करते, उसे मंजूर कर लेते हैं। 

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