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Savita Punia Hockey: सिरसा की इस बेटी ने दीवार की तरह रोका था चीन का पेनल्टी स्ट्रोक
जोधका ढाणी में टीवी से चिपका रहा परिवार, सरसा में गूंज उठीं तालियां
Savita Punia Hockey: सरसा (सच कहूँ/सुनील वर्मा)। चीन के खिलाफ फाइनल में भारतीय महिला हॉकी टीम की जीत के साथ ही सरसा के जोधका ढाणी स्थित गोलकीपर सविता पूनिया के घर में खुशी का माहौल बन गया। टीवी स्क्रीन पर दादी उमा देवी, मां लीलावती, भाई भविष्या और अशोक, भाभियां पूनम और गरिमा तथा भतीजियां रावि और विवा मैच देख रही थीं।
चीन को पेनल्टी स्ट्रोक मिला तो परिवार की धड़कनें बढ़ गईं, लेकिन सविता ने शानदार बचाव करते हुए गोल रोक दिया। इसके साथ ही घर में तालियां गूंज उठीं। भारत की जीत के बाद परिजनों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जश्न मनाया। सविता के पिता महेंद्र पुनिया उस समय अपनी दुकान पर थे।
मैच खत्म होने के बाद उन्होंने बेटी को फोन पर बधाई दी। परिवार के लिए सबसे भावुक पल वह था, जब सविता ने चीन का पेनल्टी स्ट्रोक रोककर भारत की बढ़त कायम रखी। परिजनों ने कहा कि देश के लिए बेटी को मैदान पर इस तरह प्रदर्शन करते देखना उनके लिए गर्व का पल है।
फाइनल में भारत ने चीन को 1-0 से हराकर एशियन गेम्स में 44 साल बाद महिला हॉकी का स्वर्ण पदक जीता। मुकाबले के दौरान चीन को पेनल्टी स्ट्रोक मिला, लेकिन सविता पूनिया ने शानदार बचाव करते हुए गोल रोक दिया। उनके इस बचाव ने भारत की बढ़त कायम रखी और टीम ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। पूरे मैच के दौरान परिवार की नजरें टीवी स्क्रीन पर टिकी रहीं। सविता के हर बचाव पर परिजनों की नजर थी और जीत के बाद घर में मिठाई बांटी गई।
पिता बोले, बेटी के लिए आज का दिन यादगार
सविता के पिता महेंद्र पुनिया ने सच कहूँ से विशेष बातचीत में कहा कि आज परिवार के लिए बेहद खुशी का दिन है। बेटी ने देश के लिए अपना योगदान दिया और टीम ने स्वर्ण पदक जीता, इससे बड़ी खुशी उनके लिए कुछ नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि मैदान पर सविता को देश के लिए गोल बचाते देखना पूरे परिवार के लिए गर्व की बात है। टीम के जीत के बाद उनकी सविता से बात हुई है। भारतीय महिला हॉकी टीम की इस जीत के साथ 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई कर लिया है। 44 साल बाद एशियन गेम्स में मिला स्वर्ण पदक सविता के परिवार के लिए भी यादगार बन गया।
22वें मिनट में सविता ने किया शानदार बचाव
44 साल का इंतजार खत्म हुआ और भारतीय महिला हॉकी ने एशियाई खेलों में इतिहास रच दिया। भारतीय महिला टीम ने फाइनल में मौजूदा एशियाई चैंपियन और विश्व रैंकिंग में चौथे स्थान पर काबिज चीन को 1-0 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। भारतीय टीम के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि महिला हॉकी में भारत ने आखिरी बार 1982 के दिल्ली एशियाई खेलों में पदक जीता था। 22वें मिनट में अनुभवी गोलकीपर सविता पूनिया ने शानदार बचाव करते हुए चीन को बराबरी करने से रोक दिया। चीन को पेनल्टी स्ट्रोक मिला था लेकिन सविता ने बाईं ओर नीचे की तरफ डाइव लगाकर शानदार सेव किया। इसके बाद शिल्पी दहिया ने भी गोललाइन के पास महत्वपूर्ण बचाव करते हुए भारत की बढ़त कायम रखी।