India-Australia Relations:भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध नई ऊंचाइयों की ओर!

जानें, क्यों हो रही है भारत-ऑस्ट्रेलिया की दोस्ती और मजबूत?

Published On

Indo-Pacific Strategy: भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व गति से मजबूत हुए हैं। कभी दोनों देशों के बीच सहयोग सीमित क्षेत्रों तक सिमटा हुआ माना जाता था, लेकिन आज यह साझेदारी ऊर्जा, व्यापार, रक्षा, शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सामरिक सुरक्षा जैसे अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक फैल चुकी है। दोनों लोकतांत्रिक देशों के साझा मूल्य और समान रणनीतिक सोच इस संबंध को लगातार नई मजबूती प्रदान कर रहे हैं। ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग विशेष महत्व रखता है। India-Australia Relations

ऑस्ट्रेलिया विश्व के सबसे बड़े यूरेनियम भंडार वाले देशों में शामिल है। वर्ष 2014 में हुए असैन्य परमाणु सहयोग समझौते तथा उसके बाद बनी व्यवस्थाओं के कारण भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम आयात का मार्ग प्रशस्त हुआ। इससे भारत को स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने और दीर्घकालीन ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता मिल रही है। 

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सामरिक चुनौतियों के बीच भी दोनों देशों का सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। भारत और ऑस्ट्रेलिया स्वतंत्र, सुरक्षित, समृद्ध तथा नियम आधारित समुद्री व्यवस्था के पक्षधर हैं। दोनों देश चतुष्कोणीय सुरक्षा संवाद के माध्यम से जापान और अमेरिका के साथ मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी प्रयास, आपदा प्रबंधन और रक्षा अभ्यासों में बढ़ता सहयोग इस रणनीतिक साझेदारी की गंभीरता को दशार्ता है।

आर्थिक संबंध भी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक सहयोग तथा व्यापार समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस व्यवस्था के कारण भारत के वस्त्र, रत्न, आभूषण, चमड़ा, अभियांत्रिकी उत्पाद और अनेक विनिर्मित वस्तुओं को ऑस्ट्रेलियाई बाजार में बेहतर अवसर मिले हैं। दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया को भारत जैसे विशाल उपभोक्ता बाजार तक व्यापक पहुंच प्राप्त हुई है। निवेश, खनन, नवीकरणीय ऊर्जा और आधारभूत संरचना जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग निरंतर बढ़ रहा है। India-Australia Relations

शिक्षा दोनों देशों के संबंधों का एक महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है। हर वर्ष बड़ी संख्या में भारतीय विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए ऑस्ट्रेलिया जाते हैं। वहां के विश्वविद्यालय अनुसंधान, नवाचार और व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय संस्थानों के साथ अनेक संयुक्त परियोजनाओं पर कार्य कर रहे हैं। कौशल विकास, अनुसंधान और नई तकनीकों के आदान-प्रदान से दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावना है।

भारतीय मूल का प्रवासी समुदाय भी दोनों देशों के बीच मजबूत सेतु की भूमिका निभा रहा है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय अपनी मेहनत, उद्यमिता और सामाजिक भागीदारी के कारण सम्मानजनक स्थान बना चुके हैं। भारतीय पर्व, संस्कृति और परंपराओं को वहां व्यापक स्वीकार्यता मिली है। इससे दोनों देशों के लोगों के बीच आत्मीयता और विश्वास लगातार बढ़ रहा है। India-Australia Relations

भारत और ऑस्ट्रेलिया का संबंध हमेशा इतना सशक्त नहीं था। शीत युद्ध के दौर में दोनों देशों की विदेश नीतियों में पर्याप्त अंतर दिखाई देता था। भारत ने गुटनिरपेक्ष नीति अपनाई, जबकि ऑस्ट्रेलिया पश्चिमी देशों के सुरक्षा ढांचे का हिस्सा रहा। वर्ष 1991 में भारत में आर्थिक सुधारों के बाद दोनों देशों के संबंधों में नई गति आई। बदलती वैश्विक परिस्थितियों और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के बढ़ते महत्व ने दोनों देशों को एक-दूसरे के और निकट ला दिया। आज दोनों देश अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी कई विषयों पर समान दृष्टिकोण रखते हैं। विश्व व्यापार, समुद्री कानून, आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर दोनों के बीच अच्छा समन्वय देखने को मिलता है। ऑस्ट्रेलिया लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन करता रहा है। यह विश्वास दोनों देशों की रणनीतिक निकटता को और मजबूत बनाता है।

हालांकि संबंधों की इस सकारात्मक तस्वीर के बीच कुछ चुनौतियां भी बनी हुई हैं। समय-समय पर ऑस्ट्रेलिया में भारतीय विद्यार्थियों और प्रवासी नागरिकों पर हमलों की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसी घटनाएं दोनों देशों के बीच बने विश्वास को प्रभावित करती हैं। इसलिए ऑस्ट्रेलिया के लिए आवश्यक है कि वह भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए, ताकि शिक्षा और रोजगार के लिए वहां जाने वाले लोगों का विश्वास और मजबूत हो। India-Australia Relations

वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी महज दो देशों के द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रह गई है। यह सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण बन चुका है। यदि दोनों देश इसी विश्वास और सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ते रहे, तो आने वाले वर्षों में यह संबंध विश्व राजनीति और अर्थव्यवस्था में एक प्रभावशाली साझेदारी के रूप में और अधिक मजबूत होकर उभरेगा।

अरविंद जयतिलक (यह लेखक के अपने विचार हैं)।

About The Author

Related Posts