Tamil Nadu Underwater Archaeology: कोर्काई और पूमपुहार में समुद्र के नीचे खोज, प्राचीन समुद्री इतिहास से उठेगा पर्दा

फरवरी तक आएगी कोर्काई और पूमपुहार में पानी के नीचे सर्वे की रिपोर्ट

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Tamil Nadu Underwater Archaeology: चेन्नई (सच कहूँ/एजेंसी)। तमिलनाडु के प्राचीन समुद्री व्यापार और सभ्यता से जुड़े रहस्यों को सामने लाने के लिए चल रहे समुद्री पुरातत्व अभियान को आने वाले महीनों में अहम दिशा मिलने की उम्मीद है। राज्य का पुरातत्व विभाग कोर्काई और पूमपुहार में किए जा रहे पानी के नीचे के सर्वेक्षण की विस्तृत रिपोर्ट अगले साल फरवरी तक सरकार को सौंपने की तैयारी में है। रिपोर्ट में कोर्काई-अजगनकुलम तटवर्ती क्षेत्र में हुए सोनार सर्वे के निष्कर्षों के साथ-साथ मयिलादुथुराई जिले के पूमपुहार में जारी अंडरवॉटर पुरातात्विक खोज के तीसरे चरण की जानकारी शामिल होगी।

अधिकारियों के मुताबिक कोर्काई में किए गए समुद्री सर्वे के दौरान आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर समुद्र तल की संरचनाओं का अध्ययन किया गया। इस अभियान में इंडियन मैरीटाइम यूनिवर्सिटी के सहयोग से मल्टी-बीम इको साउंडर, साइड-स्कैन सोनार और सब-बॉटम प्रोफाइलर जैसे उपकरणों का उपयोग किया गया।

साइड-स्कैन सोनार से संबंधित कार्य पूरा हो चुका है। हालांकि, सोनार से प्राप्त तस्वीरों के आधार पर किसी संरचना को सीधे प्राचीन बंदरगाह या पुरातात्विक अवशेष घोषित करना संभव नहीं है। इसलिए रिपोर्ट की समीक्षा और आवश्यक स्वीकृति के बाद संभावित स्थलों पर गोताखोरी अभियान चलाया जाएगा। डाइविंग के दौरान यह पता लगाने का प्रयास होगा कि समुद्र तल पर दिखाई देने वाली संरचनाएं जहाजों के अवशेष, किसी प्राचीन निर्माण के हिस्से या अन्य पुरातात्विक सामग्री से संबंधित हैं या नहीं।

अभी पूरा हुआ है प्रोजेक्ट का शुरुआती हिस्सा

अधिकारियों के अनुसार, पूरे समुद्री पुरातत्व प्रोजेक्ट का लगभग 10 प्रतिशत कार्य ही अभी पूरा हुआ है। शुरुआती सर्वेक्षणों में पूमपुहार क्षेत्र में महत्वपूर्ण संभावनाएं सामने आने के बाद वहां की खोज को प्राथमिकता दी गई। पूमपुहार में पहले भी समुद्र के नीचे पुरातात्विक गतिविधियों के दौरान मिट्टी के बर्तनों और जहाजों के अवशेष मिलने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, इन खोजों का दृश्य रिकॉर्ड सीमित था। नए अभियान में पुरावशेषों की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें और विस्तृत दृश्य दस्तावेज तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

कोर्काई को प्राचीन तमिल क्षेत्र के प्रमुख समुद्री केंद्रों में गिना जाता है। यह संगम युग के दौरान पांड्य शासन का महत्वपूर्ण बंदरगाह माना जाता है। ऐतिहासिक संदर्भों में इसके रोमन दुनिया के साथ व्यापारिक संपर्क और मोती के कारोबार से जुड़े होने का उल्लेख मिलता है। 1968-69 के दौरान कोर्काई में हुई पुरातात्विक खुदाई में कई महत्वपूर्ण अवशेष सामने आए थे। इनमें कलाकृतियां, शंख काटने से संबंधित कार्यशालाएं और मोती वाले सीप को संसाधित करने के प्रमाण शामिल थे। इसके अलावा बुनाई और शिकार जैसी गतिविधियों से जुड़े टेराकोटा दीपक तथा हड्डी से बने नुकीले औजार भी मिले थे।

समुद्री व्यापार के इतिहास को मिल सकती है नई जानकारी

पुरातत्वविदों के अनुसार, समुद्र के भीतर की व्यवस्थित जांच से कोर्काई और पूमपुहार से जुड़ी पुरानी खोजों को नए साक्ष्य मिल सकते हैं। यदि समुद्र तल पर मौजूद संरचनाओं की पुरातात्विक पुष्टि होती है, तो इससे प्राचीन तमिल समाज के समुद्री व्यापार, नौवहन व्यवस्था और हिंद महासागर क्षेत्र में उसके कारोबारी संपर्कों को समझने में मदद मिल सकती है। आने वाली रिपोर्ट और उसके बाद प्रस्तावित डाइविंग अभियान इसलिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं क्योंकि इनके जरिए समुद्र में दबे संभावित अवशेषों का प्रत्यक्ष अध्ययन संभव होगा।

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