Rajasthan High Court: 10 पार्षदों की गिरफ्तारी को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

निकाय चुनावों से पहले लगी गिरफ्तारी पर रोक

Published On

Rajasthan High Court: जयपुर (सच कहूँ/एजेंसी)। राजस्थान में नगर निकायों के महापौर और सभापति पद के चुनाव से पहले रविवार को राजस्थान हाईकोर्ट में असाधारण रूप से देर रात तक विशेष सुनवाई हुई। चुनावी प्रक्रिया में शामिल पार्षदों और प्रत्याशियों की ओर से गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए तत्काल न्यायिक संरक्षण की मांग की गई थी। मामले की तात्कालिकता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर विशेष पीठों का गठन किया गया।

जोधपुर स्थित हाईकोर्ट की मुख्य पीठ में रविवार रात करीब 10 बजे से अर्जेंट मामलों की सुनवाई शुरू हुई और कार्यवाही देर रात तक चली। अदालत ने हनुमानगढ़ के नौ पार्षदों को अंतरिम राहत देते हुए फिलहाल उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी। जस्टिस नूपुर भाटी की विशेष एकलपीठ ने इस मामले की सुनवाई की।

बीकानेर के पार्षद मकसूद अहमद को भी राहत

बीकानेर नगर निगम के वार्ड 18 से निर्वाचित कांग्रेस पार्षद मकसूद अहमद ने भी गिरफ्तारी की आशंका को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया था। उनकी याचिका पर जस्टिस सुनील बेनीवाल की पीठ ने देर रात सुनवाई की और उन्हें अंतरिम संरक्षण प्रदान किया। रिपोर्टों के अनुसार, मामला करीब दो महीने पुरानी एफआईआर से जुड़ा था और पुलिस ने उन्हें पूछताछ के लिए नोटिस दिया था।

याचिका में यह आशंका जताई गई थी कि चुनाव से ठीक पहले पुलिस कार्रवाई होने पर मकसूद अहमद सोमवार को होने वाले महापौर चुनाव में मतदान नहीं कर पाएंगे। अदालत की ओर से दी गई अंतरिम राहत के बाद उन्हें चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिला।

हनुमानगढ़ नगर परिषद में कुल 60 वार्ड हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक भाजपा ने 15 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल समर्थित उम्मीदवारों ने 32 सीटों पर जीत हासिल की। ऐसे में सभापति पद के चुनाव को लेकर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां तेज थीं। इसी दौरान बंसल को 23 वर्ष पुराने जमीन संबंधी मामले में पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा। उनके समर्थकों ने इस कार्रवाई को लेकर विरोध भी जताया, जबकि पुलिस की ओर से मामले में कार्रवाई की गई।

अन्य पार्षदों के मामलों में भी अदालत ने दी राहत

रविवार को राजस्थान हाईकोर्ट में निकाय चुनाव से जुड़े अन्य मामलों की भी विशेष सुनवाई हुई। नागौर के कुचेरा नगरपालिका से जुड़े पार्षद एवं पूर्व चेयरमैन तेजपाल मिर्धा तथा श्रीविजयनगर के सुशील मिर्धा को भी गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिए जाने की जानकारी सामने आई है। राज्य के कई शहरी स्थानीय निकायों में सोमवार को महापौर, सभापति और अध्यक्ष पदों के चुनाव होने हैं। वहीं जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों में महापौर पद के लिए मतदान 25 सितंबर को प्रस्तावित है।

नगर निकाय चुनाव अप्रत्यक्ष मतदान के जरिए होने के कारण निर्वाचित पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले गिरफ्तारी की आशंका को लेकर दायर याचिकाओं और हाईकोर्ट की विशेष सुनवाई ने निकाय चुनावों के बीच कानूनी गतिविधियों को भी चर्चा में ला दिया है। हाईकोर्ट की अंतरिम राहत संबंधित मामलों में फिलहाल लागू है। आगे की कानूनी स्थिति संबंधित मामलों में अदालत के आगामी आदेशों पर निर्भर करेगी।

About The Author

Related Posts