World Chess Champion 2026: इतनी छोटी सी उम्र में विश्व शतरंज चैंपियन बनकर डी गुकेश ने रचा इतिहास
7 साल की उम्र में चली थी सबसे युवा वर्ल्ड चैंपियन ने शतरंज की पहली बाजी
World Chess Champion 2026: नई दिल्ली। भारतीय शतरंज जगत में डोम्माराजू गुकेश एक ऐसे नाम के रूप में उभरे हैं, जिन्होंने कम उम्र में अपनी प्रतिभा और धैर्य के दम पर विश्व मंच पर भारत का गौरव बढ़ाया है। बचपन में शतरंज की बिसात पर शुरू हुआ उनका सफर आज उन्हें विश्व चैंपियन के मुकाम तक पहुंचा चुका है। अपनी रणनीतिक सोच और शांत स्वभाव के कारण वह दुनिया के दिग्गज खिलाड़ियों के बीच विशेष पहचान बना चुके हैं। Chess News
29 मई 2006 को चेन्नई में जन्मे गुकेश ऐसे परिवार से आते हैं, जिसका खेल जगत से प्रत्यक्ष संबंध नहीं रहा। उनके पिता चिकित्सक हैं, जबकि माता विज्ञान के क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं। इसके बावजूद बचपन से ही गुकेश का रुझान शतरंज की ओर रहा और उन्होंने बहुत छोटी उम्र में इस खेल को गंभीरता से अपनाना शुरू कर दिया।
कहा जाता है कि पढ़ाई के साथ-साथ उनका अधिक समय शतरंज की रणनीतियों को समझने और अभ्यास में बीतता था। शुरुआती दिनों में ही उनके प्रशिक्षकों ने उनकी असाधारण प्रतिभा को पहचान लिया था। स्थानीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी। कम उम्र में एशियाई और विश्व स्तरीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर गुकेश ने यह संकेत दे दिया था कि वह आने वाले समय में शतरंज की दुनिया में बड़ा नाम बनने वाले हैं। Chess News
किशोर अवस्था में ही उन्होंने ग्रैंडमास्टर का खिताब हासिल कर इतिहास रच दिया और विश्व के सबसे युवा ग्रैंडमास्टर्स में स्थान बनाया। वर्ष 2024 उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ, जब उन्होंने विश्व शतरंज चैंपियन बनकर नया इतिहास रचा। महज 18 वर्ष की आयु में यह उपलब्धि हासिल कर उन्होंने दुनिया के कई दिग्गज खिलाड़ियों के रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए।
इस उपलब्धि के साथ वह विश्वनाथन आनंद के बाद विश्व शतरंज चैंपियन बनने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी बने। उनकी इस ऐतिहासिक सफलता ने भारतीय शतरंज को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। देशभर में उनकी उपलब्धि का स्वागत किया गया और युवा खिलाड़ियों के लिए वह प्रेरणा बन गए।
खेल जगत में उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें प्रतिष्ठित मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से भी सम्मानित किया। आज डी गुकेश केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के आत्मविश्वास, अनुशासन और समर्पण के प्रतीक बन चुके हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि कठिन परिश्रम और निरंतर अभ्यास से कम उम्र में भी विश्व स्तर पर बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। Chess News