गांव कलोठा से चली नशे के खिलाफ अनोखी मुहिम! ‘नशामुक्त भारत’ की आवाज की बुलंद
5 हजार दंड-बैठक लगाकर युवाओं को जागरूक कर रहा राकेश कुमार
'Drug-Free India' Campaign: फतेहाबाद (विनोद कुमार शर्मा)। हरियाणा में बढ़ते नशे के खिलाफ अब गांवों से भी आवाज उठने लगी है। रतिया क्षेत्र के गांव कलोठा निवासी राकेश कुमार पुत्र कश्मीर सिंह ने युवाओं को नशे से दूर रखने और खेलों के प्रति प्रेरित करने के लिए अनोखी मुहिम शुरू की है। राकेश कुमार अपनी मेहनत, जुनून और कठिन अभ्यास के दम पर दंड-बैठकों के माध्यम से युवाओं को जागरूक कर रहे हैं। Fatehabad News
राकेश कुमार का दावा है कि वह मात्र 2 घंटे में लगातार 5 हजार दंड-पुष्प (दंड-बैठक) निकाल लेते हैं। उनका कहना है कि उनका मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर कर खेलों की ओर प्रेरित करना है। उनका मानना है कि यदि युवा खेलों से जुड़ेंगे तो उनका शरीर स्वस्थ रहेगा और समाज भी नशे जैसी बुराइयों से मुक्त हो सकेगा। उन्होंने बताया कि वह 80 किलो वजन उठाकर 600 दंड-बैठक लगाने की क्षमता रखते हैं। इसके अलावा वह एक टांग पर बिना रुके 2 किलोमीटर तक दौड़ भी लगा सकते हैं। अपनी इसी प्रतिभा व कठिन मेहनत के दम पर वह अब वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का सपना देख रहे हैं। Fatehabad News
खुला मुकाबला
5000 दण्ड बैठक (पुष्प बैठक) लगातार।
80 किलो वजन के साथ 600 दण्ड बैठक।
एक टांग पर 2 किलोमीटर रेस (बिना रुके)।
छोटे बच्चे द्वारा 300 दण्ड बैठक भी लगाई जाती है। कई राज्यों में पहुंचा नशामुक्ति का संदेश राकेश कुमार ने बताया कि युवाओं को जागरूक करने के लिए वह हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, गुजरात और मुंबई सहित कई राज्यों में जा चुके हैं। जहां भी वह जाते हैं, वहां युवाओं को नशे से दूर रहने और खेलों को अपनाने का संदेश देते हैं। उनका कहना है कि लोगों और युवाओं का अच्छा सहयोग मिल रहा है, जिससे उनका हौसला लगातार बढ़ रहा है। Fatehabad News
पिता से मिली प्रेरणा, घर से शुरू हुआ सफर राकेश कुमार ने अपनी प्रेरणा का श्रेय अपने पिता कश्मीर सिंह को दिया। उन्होंने बताया कि उनके पिता कुश्ती खिलाड़ी थे। बचपन से ही पिता को खेलों से जुड़ा देखकर उनका भी रुझान व्यायाम और खेलों की ओर बढ़ गया। शुरूआत में उन्होंने घर पर ही दंड-बैठक लगानी शुरू की और धीरे-धीरे यही उनकी पहचान बन गई।
सात वर्षीय बेटा भी निभा रहा साथ दिलचस्प बात यह है कि अब उनका सात वर्षीय बेटा गोल्ड भी इस मुहिम में उनका साथ दे रहा है। छोटा गोल्ड भी सैकड़ों दंड-बैठक लगाकर लोगों को प्रेरित कर रहा है। राकेश कुमार का कहना है कि वह चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी नशे से दूर रहकर स्वस्थ और मजबूत भारत के निर्माण में योगदान दे।
मजदूरी कर चला रहे परिवार, लेकिन संकल्प अडिग आर्थिक रूप से साधारण परिवार से जुड़े राकेश कुमार अन्य दिनों में मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं, लेकिन समाज को नशामुक्त बनाने के अपने संकल्प को उन्होंने कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। गांव के लोग भी उनकी मेहनत और समाज सेवा की भावना की सराहना कर रहे हैं। Fatehabad News