हरियाणा की 75 लाख एकड़ भूमि की मृदा जांच का लक्ष्य : मनोहर लाल

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सरसा (सुनील वर्मा)। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि आगामी तीन वर्षों में कृषि विभाग व मार्केटिंग बोर्ड ने प्रदेश की 75 लाख एकड़ भूमि की मृदा की जांच करवाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2021-22 में प्रदेश की 25 लाख एकड़ भूमि की मृदा जांच की जाएगी। उन्होंने आज यहां कहा कि अन्न उत्पादन में हमें क्वांटिटी के साथ-साथ क्वालिटी का भी ध्यान रखना है और भूमि परीक्षण प्रयोगशालाएं इसमें बहुत कारगर साबित होगी। कृषि विभाग प्रत्येक स्तर पर निरंतर अपने कदम आगे बढ़ा रहा है।

मुख्यमंत्री ने आज वीडियो कॉफ्रेंसिंग के माध्यम से हर खेत-स्वस्थ खेत अभियान के तहत प्रदेश के चौदह जिलों में 40 नई भूमि परीक्षण प्रयोगशालाओं के उद्घाटन किया। इन मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं पर 532.21 लाख रुपये की लागत आई है। इनमें जिला सिरसा की 124.23 लाख रुपये की लागत से बनाई गई पांच नई प्रयोगशालाएं भी शामिल है। उनके साथ कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जयप्रकाश दलाल, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा, महानिदेशक डॉ. हरदीप सिंह, मुख्य प्रशासक मार्केटिंग बोर्ड विनय सिंह, इंजीनियर इन चीफ उदयभान मौजूद थे।

भूमि स्वस्थ होगी तो फसलों में बीमारियां नहीं लगेगी

मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का लाइव प्रसारण स्थानीय लघु सचिवालय के बैठक कक्ष में आयोजित जिला स्तरीय समारोह में किया गया। उन्होंने कहा कि भूमि की जांच से ही पता चलता है कि भूमि में किन उर्वरकों की कमी है, इसलिए किसान वैज्ञानिक खेती से जुड़कर भूमि के स्वास्थ्य सुधार की दिशा में कदम बढ़ाए। भूमि स्वस्थ होगी तो फसलों में बीमारियां नहीं लगेगी और फसल की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। फसलों में अत्याधिक पेस्टीसाइड व केमिकल का उपयोग करने से भूमि के स्वास्थ्य में गिरावट आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृदा जांच अभियान की शुरूआत की थी, इसी कड़ी में इन प्रयोगशालाओं को किसानों को समर्पित किया गया है।

सरकार ने किसानों की आय में वृद्धि की

दलाल ने कहा कि ये प्रयोगशालाएं किसानों के लिए बहुत लाभदायक साबित होगी और पूरे हरियाणा में इन प्रयोगशालाओं का जाल बिछाया जाएगा। यदि मिट्टी स्वस्थ है तो भूमि उपजाऊ होगी, फसल अच्छी होगी तथा लागत कम आएगी। सरकार द्वारा किसानों की आय वृद्धि की दिशा में व उनके कल्याण के लिए अनेकों योजनाएं जैसे सूक्ष्म सिंचाई योजना, मंडियों में सुधार, फसल विविधीकरण, भूमि की मैपिंग, मेरी फसल-मेरा ब्यौरा आदि क्रियांवित की जा रही है। ये सभी योजनाएं किसान को आर्थिक रुप से सुदृढ करने की दिशा में कारगर साबित हो रही है।

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