Kurukshetra Sports Trials: कुरुक्षेत्र में शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेल्फेयर कमेटी के पारंपरिक खेलों का महाकुंभ
ले अंगूर खा और गुलस्टिक ने मोहा सबका मन
Anami-E-Sai Diwas: कुरुक्षेत्र, (सच कहूँ/देवीलाल बारना)। धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के सेक्टर-5 स्थित भगवान परशुराम कॉलेज का प्रांगण रविवार को गजब के उत्साह, उमंग और खेल भावना से सराबोर नजर आया। मौका था शाह सतनाम जी ग्रीन वेल्फेयर फोर्स वेलफेयर कमेटी की ओर से आयोजित अनामी ए साईं दिवस के पावन अवसर पर भव्य खेल ट्रायल का। इस विशेष आयोजन में पारंपरिक ग्रामीण खेलों का ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर शख्स का दिल जीत लिया।
एक तरफ जहां युवाओं ने अपनी दमखम और फुर्ती का प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक खेलों ने दर्शकों को उनके बचपन की सुनहरी यादों से जोड़ दिया। यह जोन-स्तरीय खेल ट्रायल कुरुक्षेत्र, अंबाला, पंचकूला, करनाल और यमुनानगर जिलों के हर वर्ग के लिए प्रतिभा दिखाने का एक बहुत बड़ा मंच साबित हुआ। सुबह की पहली किरण के साथ ही विभिन्न जिलों से पहुंचे खिलाड़ियों का जोश देखने लायक था। अनुशासन और उत्साह से ओत-प्रोत इन खिलाड़ियों की आंखों में अपनी प्रदेश-स्तरीय टीम में जगह बनाने की एक अलग ही चमक थी। जोन स्तर पर हुए इन कड़े मुकाबलों के जरिए बेहतरीन खिलाड़ियों को चुना गया है, जो अब आगामी राज्य-स्तरीय प्रतियोगिताओं में अपने-अपने जिलों का प्रतिनिधित्व करेंगे।
गुलस्टिक के रोमांचक मुकाबलों ने बांधा समां
इस खेल कुंभ में सबसे बड़ा आकर्षण पूज्य गुरु जी द्वारा इजाद खेल गुलस्टिक रहा। जैसे ही गुलस्टिक के मुकाबले शुरू हुए, मैदान में बैठी भीड़ सांसें थामकर देखने लगी। स्टिक और गिल्ली के इस पारंपरिक खेल में खिलाड़ियों की एकाग्रता, निशाना साधने की कला ने सभी को हैरान कर दिया। रोमांचक पलों से भरे इन मुकाबलों में खिलाड़ियों ने एक-एक अंक के लिए पूरा जोर लगाया। मैदान पर गूंजती खिलाड़ियों की हौसला अफजाई करती आवाजें और हर सफल शॉट पर बजने वाली तालियों ने पूरे माहौल को बेहद जीवंत और ऊर्जावान बना दिया। कोच कुलदीप ने बताया कि इस खेल में बॉल की जगह लकड़ी से बनी गुल होती है। रन को रस, बॉल को गुल, बॉलर को गुलर व बैट्समैन को योद्धा बोलते हैं। इस खेल को बड़ा छोटा किसी भी आयुवर्ग का खिलाड़ी खेल सकता है।
पारंपरिक खेल साबित होंगें नशे का खात्मा करने में सहायक
पूर्व सरपंच संतोष सुरमी, कृष्ण लाल मोहननगर, प्रवीण कड़ामी, अनिल कुमार, जोगिंद्र सिंह, मा. ओमप्रकाश व राकेश अग्रवाल ने कहा कि पूज्य गुरु जी ने जिस प्रकार से पारंपरिक खेल मुकाबलों को दोबारा से जीवित करने के लिए इन प्रतियोगिताओं को शुरू किया है। लाजमी ही ये मुकाबले युवाओं में खेलों के प्रति रूझान पैदा करेंगें व नशे का खात्मा होगा। पुरातन काल में कुछ समय मिलते ही पारंपरिक खेलों में युवा व्यस्त रहते थे, ऐसे में बुराईयों से बचे रहते थे। पूज्य गुरु जी की इस प्रेरणा से फिर से युवाओं का ध्यान खेलों की ओर लगने लगा है।
‘ले अंगूर खा, मुंह से खा, हाथ ना लगा’ ने सबको किया हंसी से लोटपोट
पारंपरिक खेल ले अंगूर खा, मुंह से खा, हाथ ना लगा के मुकाबले जैसे ही शुरू हुए। यह खेल जैसे ही शुरू हुआ तो दर्शकों को हंसी से लोटपोट कर दिया। बिना हाथों का इस्तेमाल किए केवल मुंह से अंगूर खाने या टास्क पूरा करने की इस कलाबाजी को देखकर बच्चे, युवा और बुजुर्ग—सभी अपनी हंसी नहीं रोक पाए। खिलाड़ियों के फनी अंदाज और अजीबोगरीब हरकतों ने पूरे खेल परिसर को ठहाकों तालियों से गूंजा दिया। इस खेल ने यह साबित कर दिया कि पारंपरिक खेल सिर्फ शारीरिक व्यायाम ही नहीं, बल्कि तनाव को दूर भगाने और चेहरों पर मुस्कान लाने का बेहतरीन जरिया हैं। पारंपरिक खेलों के साथ-साथ आधुनिक और एथलेटिक्स स्पर्धार्ओं में भी खिलाड़ियों ने अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवाया। ट्रैक पर जब धावकों ने दौड़ लगाना शुरू किया, तो पूरा स्टेडियम उत्साह से गूंज उठा।
भविष्य के चैंपियंस को तराशने का महाअभियान
इस पूरे आयोजन की रूपरेखा और सफल संचालन के बारे में जानकारी देते हुए कोच मनु इन्सां और कुलदीप इन्सां ने बताया कि इस जोन-स्तरीय प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी प्रतिभाओं को एक ऐसा मंच देना है जहाँ वे अपनी छिपी हुई कला को निखार सकें। उन्होंने कहा कि इन जोन-स्तरीय ट्रायल से उन चुनिंदा और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को छांटा गया है, जो आने वाले दिनों में स्टेट-लेवल प्रतियोगिताओं में मैदान पर उतरेंगे और अपनी कला का जौहर दिखाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि शाह सतनाम जी ग्रीन वेल्फेयर कमेटी हमेशा से युवाओं को नशे जैसी बुराइयों से दूर रखकर खेलों और समाज सेवा से जोड़ने का सराहनीय कार्य करती आ रही है।

