गौरव पट्ट पर सुनहरे अक्षरों में दर्ज हुए शरीरदानियों के नाम
गांव चांदपुरा में 12 डेरा प्रेमियों ने किया मरणोपरांत शरीरदान, मेडिकल छात्रों के भविष्य को दे रहे नई रोशनी
जाखल (सच कहूँ/तरसेम सिंह)। Jakhal News: ‘‘मंजिल तो तेरी यहीं थी, इतनी देर लगा दी आते-आते, क्या मिला तुझे जिंदगी से, अपनों ने ही जला दिया जाते-जाते।’’ अक्सर श्मशान घाटों के मुख्य द्वार पर लिखे ये वैराग्यपूर्ण शब्द इंसान को जीवन की नश्वरता का अहसास कराते हैं। अधिकांश लोग जीवन की अंतिम यात्रा को केवल अंतिम संस्कार तक ही सीमित मानते हैं। इसके विपरीत, जाखल ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले गांव चांदपुरा के ग्रामीणों ने इस सोच से परे जाकर मानवता की एक ऐसी अनूठी और अनुकरणीय मिसाल पेश की है, जिसने न केवल क्षेत्र का नाम रोशन किया है, बल्कि चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में भी एक बहुत बड़ा योगदान दिया है। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा पर चलते हुए डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी जीते जी तो इंसानियत और समाज सेवा के कार्यों में आगे रहते ही हैं बल्कि मरणोपरांत भी शरीर दान कर अनुकरणीय मिसाल बन रहे हैं।
इसी कड़ी में हरियाणा में फतेहाबाद जिले के गांव चांदपुरा से अब तक मरणोपरांत 12 डेरा प्रेमियों के पार्थिव शरीर दान हो चुके हैं। इन दानवीरों की पार्थिव देहों ने विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में रिसर्च करने वाले छात्र-छात्राओं को एक कुशल और योग्य डॉक्टर बनने के लिए प्रैक्टिकल शिक्षा हासिल करने में मदद की है।
‘गौरव पट्ट’ पर अंकित हैं दानवीरों के नाम
गाँव चाँदपुरा में डेरा सच्चा सौदा से जुड़े इन शरीरदानियों की सूची को पूरे सम्मान के साथ गांव के ‘गौरव पट्ट’ पर अंकित किया गया है। यह गौरव पट्ट अब आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुका है। क्षेत्र के लोग इन परिवारों की भूरि-भूरि प्रशंसा कर रहे हैं।
नेत्रदान और रक्तदान में भी अग्रणी
चांदपुरा गांव के डेरा सच्चा सौदा अनुयायियों का सेवाभाव केवल शरीरदान तक ही सीमित नहीं है। इस गांव से अब तक 2 लोगों के मरणोपरांत नेत्रदान भी किए जा चुके हैं, जिन्होंने अंधेरी ज़िंदगियों को रोशन किया। नेत्रदान करने वालों में दलीप सिंह के पुत्र प्रेमी संसार सिंह इन्सां और माता अमरजीत कौर पत्नी जरनैल सिंह शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, गांव के डेरा प्रेमियों ने समय-समय पर सैकड़ों यूनिट रक्तदान कर जरूरतमंद मरीजों की जान बचाने में सक्रिय भूमिका निभाई है।
डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा से हमारे गांव चांदपुरा के इन परिवारों ने जो हौसला और सेवा भावना दिखाई है, वह पूरे समाज के लिए मार्गदर्शक है। मृत्यु के बाद शरीर को पंचतत्व में विलीन होना ही होता है, लेकिन उसे चिकित्सा अनुसंधान के लिए दान देकर इन परिवारों ने कई युवाओं के डॉक्टर बनने का रास्ता साफ किया है। पूरे गांव को अपने इन दानवीरों और उनके परिवारों पर नाज है। ग्राम पंचायत इन सभी महान आत्माओं को नमन करती है। -अमरीक सिंह ग्रेवाल, गांव चाँदपुरा के सरपंच
चिकित्सा विज्ञान की पढ़ाई में थ्योरी से कहीं ज्यादा प्रैक्टिकल ज्ञान की जरूरत होती है। एक बेहतरीन सर्जन या फिजिशियन बनने के लिए मेडिकल छात्रों को मानव शरीर की आंतरिक संरचना को गहराई से समझना पड़ता है। आज के समय में मेडिकल कॉलेजों में रिसर्च के लिए मानव शरीरों की भारी कमी रहती है। ऐसे में चांदपुरा के ग्रामीणों द्वारा किया गया यह प्रयास आने वाले समय में सैकड़ों कुशल डॉक्टर तैयार करने में संजीवनी का काम करेगा। यह अंधविश्वास के खिलाफ एक बड़ी जीत है। -डॉ. राजेश क्रांति, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी