ब्लॉक रोड़ी के सेवादारों ने एक दिन में बदल दी जरूरतमंद महिला के जर्जर मकान की दयनीय हालत
बना दिए दो पक्के कमरे, एक वर्ष से टीन शेड में रह रहा था परिवार, 9 साल पहले पति की मौत
सरसा (सच कहूँ/राजू)। 7 राज मिस्त्री व 60 सेवादारों ने मिलकर मात्र एक दिन में एक वर्ष पुरानी समस्या का समाधान कर दिया। जिस जगह कल तक गिरा हुआ जर्जर मकान था वहां देखते ही देखते 2 पक्के कमरे बना दिए गए। इस कार्य की क्षेत्र में खूब चर्चा हो रही है। दरअसल ब्लॉक रोड़ी के गांव थिराज में रहने वाली गुलाब कौर के पति हरदम सिंह की करीब 9 वर्ष पूर्व मौत हो गई थी। जो भी चल-अचल संपत्ति थी वो पति-पत्नी के दुर्घटना के इलाज में खत्म हो गई। Sirsa News
गुलाब कौर के 3 बच्चे हैं जिनमें से एक बेटा व एक बेटी शादीशुदा है और एक बेटा दिहाड़ी-मजदूरी करता है। बड़ा बेटा मानसिक रूप से अस्वस्थ है। करीब एक वर्ष पूर्व बरसात के कारण गुलाब कौर का मकान ढह गया। जिसके बाद से वह टीन की छत युक्त कच्चे भूसे वाले मकान में अपने बेटों व पुत्रवधू के साथ रह रही थी। जब बरसात होती तो पूरा परिवार चिंता में पड़ जाता। छोटा बेटा जैसे-तैसे कर घर का खर्च व बड़े भाई व मां की दवाइयों का खर्च तो चला सकता था, लेकिन उसके लिए पक्का मकान बनाना बेहद मुश्किल था।
गुलाब कौर की इस स्थिति का पता जब गांव की साध-संगत को लगा तो उन्होंने ब्लॉक के जिम्मेवार सदस्यों से संपर्क किया। ब्लॉक कमेटी व साध-संगत ने अपने मुर्शिद के पावन वचनों पर चलते हुए मदद के लिए हाथ बढ़ा दिए। सोमवार को रोड़ी ब्लॉक से बड़ी संख्या में साध-संगत साजो सामान लेकर गुलाब कौर के गिरे पड़े मकान की नुहार बदलने पहुंच गई। निर्माण कार्य की शुरूआत बेनती भजन के साथ हुई जिसके बाद साध-संगत ने इलाही नारा लगाते हुए कार्य शुरू कर दिया। जिस कोठड़़ों का मलबा था, वहां देखते ही देखते पक्का मकान बनकर तैयार हो गया। Sirsa News
इस सेवा कार्य में साध-संगत में इस कदर उत्साह देखा गया कि बरसात की परवाह किए बगैर साध-संगत बिना रुके-बिना थके तन्मयता के साथ जुटी रही। इस सेवा में साध-संगत का जज्बा देखने योग्य था। हर कोई इस कार्य में अपना योगदान निभाने को आतुर दिखा। डेरा अनुयायियों ने गुलाब कौर के घर से खाना तो दूर पानी तक नहीं पिया। साध-संगत ने चाय-पानी व लंगर का प्रबंध भी अपने स्तर पर कर रखा था। साध-संगत को तन्मयता के साथ जुटे देख मोहल्ले के लोग हैरानीवश घरों से बाहर निकल आए। उनका कहना था कि डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी वास्तव में फरिश्तों के समान है। वहीं उन्होंने साध-संगत के इस जज्बे पर पूज्य गुरु जी की सराहना करते हुए कहा कि धन्य हैं ऐसे गुरु जो अपने शिष्यों को ऐसी शिक्षा देते हैं। Sirsa News
पूज्य गुरु जी के पावन वचनों पर चलते हुए साध-संगत ने विचार विमर्श कर बहन गुलाब कौर को आशियाना बनाकर देने का निर्णय लिया था। ब्लॉक की साध-संगत ने मिलकर मात्र एक दिन में मकान खड़ा कर दिया। पूज्य पिताजी ने हमें यही शिक्षा दी है कि इंसानियत की सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं है। साध-संगत जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए हर समय तत्पर है। - पवन इन्सां, ब्लॉक प्रेमी सेवक (रोड़ी)।
डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत ने न केवल हमारा दु:ख समझा बल्कि दूर भी कर दिया। हमारे घर से तो एक कप चाय तक नहीं पी। चाय से लेकर लंगर तक की व्यवस्था साध-संगत ने खुद ही की। हमने सोचा नहीं था कि हमें पक्का मकान मिल जाएगा। मेरा परिवार डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु जी का कोटि-कोटि आभार व्यक्त करता है। धन्य है ऐसे सतगुरु जी जो अपने अनुयायियों को ऐसी शिक्षा देते हैं। साध-संगत का आभार व्यक्त करने के लिए मेरे पास शब्द नहींं है। -गुलाब कौर