बारिश के बाद पटियाला की अनाज मंडी की सड़कों पर बहा धान, खुली प्रबंधों की पोल

अनाज मंडी में दूसरे दिन भी हालात खराब, मजदूर भीगे धान को सुखाने में जुटे

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पटियाला, सच कहूँ/खुशवीर सिंह तूर। Patiala News: बारिश के दूसरे दिन भी अनाज मंडियों में हालात खराब दिखाई दिए। किसानों का बारिश के पानी में बहकर सड़कों पर बिखरा धान सरकारी प्रबंधों की पोल खोल रहा था। वहीं, मजदूर भीगे हुए धान को सुखाने का प्रयास कर रहे थे। बारिश के कारण खराब हुई धान की फसल को देखकर किसानों में रोष दिखाई दिया। गौरतलब है कि बीते दिन पंजाब के कई इलाकों में हुई भारी बारिश ने जहाँ किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया, वहीं मंडियों में सरकारी प्रबंधों की नाकामी भी खुलकर सामने आई।

किसानों में इस बात को लेकर गुस्सा है कि वे प्रकृति के सामने कुछ नहीं कर सकते, लेकिन जहांँ सरकारी प्रबंधों की नाकामी के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है, उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? पटियाला की अनाज मंडी का दौरा करने पर दूसरे दिन भी बारिश से हुए नुकसान के निशान साफ दिखाई दिए। किसानों का धान पानी में बहकर मंडी की सड़कों पर बिखरा पड़ा था। हालांकि मजदूर इस धान को इकट्ठा कर रहे थे, लेकिन किसान अपनी बुरी तरह खराब हुई फसल को देखकर परेशान थे।

किसान बलदेव सिंह और सरूप सिंह ने बताया कि बारिश के कारण मंडी में पानी इसलिए भर गया, क्योंकि मंडी का सीवरेज जाम था और पानी की निकासी नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि मार्केट कमेटी को खरीद सीजन शुरू होने से पहले सीवरेज की सफाई करवानी चाहिए थी। 

किसानों का नुकसान होने के बाद मार्केट कमेटी ने सीवरेज सिस्टम की सफाई करवाई। किसानों ने सवाल उठाया कि बारिश से हुए नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा? बारिश के कारण कई जगहों पर भीगे हुए धान को मजदूरों द्वारा जमीन पर फैलाकर सुखाया जा रहा था। मार्केट कमेटी पटियाला के सचिव जोनी गर्ग ने बताया कि अब तक 37,500 मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि सीवरेज में धान की पराली और अवशेष फंसने के कारण पानी की निकासी में परेशानी आई थी। गौरतलब है कि जिले की कई अन्य मंडियों में भी इसी तरह के हालात देखने को मिले।

आठ दिन से मंडी में बैठा हूँ: किसान मिन्द्र सिंह

पटियाला की अनाज मंडी में किसान मिन्द्र सिंह ने बताया कि वह पिछले आठ दिनों से अपनी धान की फसल लेकर मंडी में बैठा है। उसका धान बिल्कुल साफ और सूखा है, लेकिन इसके बावजूद उसमें नमी की मात्रा अधिक बताकर किसानों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब दूसरे नमी मापक यंत्रों से धान की जाँच करवाई गई तो उसमें नमी बहुत कम पाई गई, लेकिन जब शेलर संचालक जांच करते हैं तो वे अधिक नमी होने का बहाना बनाते हैं। इसी तरह किसान मनिन्द्र सिंह हसनपुर ने बताया कि बोली लगाने वाले इंस्पेक्टर मंडी में केवल दो-चार ढेरियों की ही बोली लगाते हैं। इस कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

धान के अवशेष सीवरेज में फंसने से निकासी में आई दिक्कत: चेयरमैन 

इस संबंध में जब मार्केट कमेटी पटियाला के चेयरमैन अशोक सिरसवाल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि बारिश के पानी के साथ धान के अवशेष सीवरेज में चले जाने के कारण सीवरेज जाम हो गया था, जिससे पानी की निकासी में परेशानी आई। जब उनसे पूछा गया कि पहले सीवरेज की सफाई क्यों नहीं करवाई गई, तो उन्होंने कहा कि धान से निकलने वाले अवशेष बारिश के पानी के साथ सीवरेज में चले गए थे। उन्होंने कहा कि आज मंडी में कोई परेशानी नहीं है और उन्होंने स्वयं मंडी का दौरा किया है। सिरसवाल ने आश्वासन दिया कि किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी।

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