पंजाब सरकार के खिलाफ महंगाई भत्ते के बकाये मामले में आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी
मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा के हलफनामे पर अदालत ने उठाए सवाल
चंडीगढ़, सच कहूँ/अश्वनी चावला। Chandigarh News: पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते (डीए) तथा महंगाई राहत (डीआर) के बकाये का भुगतान नहीं करने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। अदालत के आदेशों का पालन नहीं होने और मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा की ओर से दाखिल हलफनामे में कथित तौर पर गलत जानकारी देने के मामले को लेकर सरकार को आपराधिक अवमानना का औपचारिक नोटिस जारी किया गया है।
इस मामले ने राज्य के करीब साढ़े सात लाख कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाये के भुगतान का मुद्दा फिर से गरमा दिया है। सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए। जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज ने मुख्य सचिव से सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) की स्थिति के बारे में पूछा। मुख्य सचिव ने कहा कि संबंधित वकील से जानकारी लेने के बाद वह अदालत में हलफनामा दाखिल करेंगे। मुख्य सचिव ने अपने खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई के संबंध में जवाब देने के लिए और समय मांगा।
कर्मचारियों की ओर से पेश हुए वकील चेतन मित्तल ने हाईकोर्ट को बताया कि करीब साढ़े सात लाख कर्मचारी और पेंशनर अपने हक के महंगाई भत्ते तथा महंगाई राहत के बकाये का इंतजार कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को 27 अक्तूबर तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में हाईकोर्ट की सहायता के लिए वरिष्ठ वकील आर.एस. चीमा को विशेष सहायक नियुक्त किया गया है। मामले की अगली सुनवाई 30 अक्तूबर को होगी।
गौरतलब है कि कर्मचारियों के बकाये के भुगतान से जुड़े इस मामले में पहले नियमित न्यायालय की अवमानना की कार्रवाई चल रही थी, लेकिन बाद में इसे आपराधिक अवमानना के दायरे में लाया गया। अब सरकार को हाईकोर्ट के समक्ष यह स्पष्ट करना होगा कि अदालत के आदेशों का पालन क्यों नहीं हुआ और सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के संबंध में पहले दी गई जानकारी की वास्तविक स्थिति क्या है।