मेरे बेटे ने तो नौकरी छोड़ दी, क्या सुनील जाखड़ अपने भतीजे को चेयरमैन पद  से हटाएंगे: बाजवा

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विधायक बाजवा के बेटे अर्जुन बाजवा ने छोड़ा इंस्पेक्टर की नौकरी का आॅफर

  • सरकारिया व तृप्त राजिंदर बाजवा को भी निशाने पर लिया
  • दादा की शहादत पर मैं ऐसी सौ नौकरियां छोड़ने को तैयार हूं: अर्जुन

चंडीगढ़ (अश्वनी चावला)। कांग्रेस विधायक फतेह सिंह बाजवा ने अपने बेटे अर्जुन बाजवा को इंस्पेक्टर लगाने के आॅफर को लौटाते ही अपनी ही पार्टी के प्रधान सुनील जाखड़, मंत्री सुखबिंदर सिंह सरकारिया और मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा से सवाल किया है। कहा कि उनके बच्चों ने अपने दादा की शहादत के बावजूद नौकरी लौटाकर नई प्रथा शुरू की है। क्या वह भी अपने-अपने भतीजे और बेटों को उन पदों से हटाएंगे जो उन्होंने किसी और सीनियर कांग्रेसी नेता का हक मार कर लिए हैं।

आज यहां अपने आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में फतेहजंग सिंह बाजवा ने कहा कि सुनील जाखड़ ने अपने भतीजे अजयवीर जाखड़ को पंजाब किसान आयोग का चेयरमैन, सुख सरकारिया ने अपने भतीजे को अमृतसर का जिला परिषद का चेयरमैन और तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने अपने बेटे को गुरदासपुर के जिला परिषद का चेयरमैन बनाया हुआ है।

साथी कर रहे गंदी राजनीति, मुझे अफसोस

उन्होंने कहा कि मुझे अपने विरोधियों द्वारा अपने ऊपर किए गए हमले का दुख नहीं है, लेकिन मेरे अपने ही साथी इस तरह की गंदी राजनीति कर रहे हैं, इसका मुझे अफसोस है। उन्होंने कहा कि मैंने तो कैबिनेट में एजेंडा लाए जाने से पहले ही मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को मैसेज भेजकर कह दिया था कि उनके बेटे को नौकरी देने वाले एजेंडे को वापस ले लिया जाए, लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मेरे पिता सतनाम सिंह बाजवा की शहादत को आदर देते हुए मेरे बेटे अर्जुन बाजवा को इंस्पेक्टर की नौकरी पर लगाया था। जिस पर हमारी अपनी ही पार्टी के नेता मेरे बच्चों के पीछे पड़े हुए हैं। उन्हें शोभा नहीं देता।

जाखड़ को सुनाई खरी-खरी

बाजवा ने कहा कि सुनील जाखड़ ने खुद उन्हें फोन करके कहा कि उनके व्यक्तिगत तौर पर मतभेद उनके बड़े भाई प्रताप सिंह बाजवा से हैं उनसे नहीं। बल्कि अर्जुन बाजवा ने तो मेरे चुनाव में मेरी मदद भी की थी। मैंने जवाब में उनसे कहा कि यह बात सोनिया गांधी को पत्र लिखने से पहले करनी चाहिए थी।

अर्जुन ने कहा- मुझे शर्म आ रही

अर्जुन बाजवा ने कहा कि जिस तरह से मुझे नौकरी देने के नाम पर सियासी रोटिंयां सेंकी जा रही हैं उसे देखकर मुझे शर्म आ रही है। अपने दादा की शहादत पर मैं ऐसी सौ नौकरियां वारने को तैयार हूं। अर्जुन बाजवा ने कहा कि नौकरी लौटाने का हमारे परिवार का कलेक्टिव फैसला है। लोग मुझे नौकरी मिलने के बारे में तो बातें कर रहे हैं लेकिन कोई अपने पिता या दादा के शहीद होने की बात नहीं कर रहा।

लोग मेरी एजुकेशन नहीं देख रहे, मेरे अमीर होने पर मुझे ताने मार रहे हैं। पुलिस की नौकरी आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि क्या मुझे अकेले को नौकरी मिली है। इससे पहले 1300 लोग अनुकंपा के आधार पर नौकरी ले चुके हैं। मैंने तो फिल्म लाइन ज्वाइन कर ली थी। मेरी फिल्म रिलीज होने वाली है, लेकिन मुझे तो विलेन ही बना दिया है। उन्होंने कहा कि टीवी पर या तो मेरी खबर दिखाई जा रही है या फिर गैंगस्टर जयपाल भुल्लर की।

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