गोवंश को राष्ट्रीय दर्जा देने की मांग, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
केन्द्रीय कानून बनाकर गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध, गो सेवा मंत्रालय गठन सहित कई मांगें उठाईं
हनुमानगढ़। गो सम्मान आह्वान अभियान के तहत सोमवार को संत समाज, गोभक्तों व जागरूक नागरिकों ने एसडीएम के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के जरिए देशभर में गोवंश की सुरक्षा, सेवा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए ठोस केन्द्रीय कानून बनाने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई। ज्ञापन में कहा गया कि भारतीय देशी गोवंश न केवल सनातन संस्कृति और आस्था का केन्द्र है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की भी मजबूत आधारशिला है।
वर्तमान में गोवंश की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बताई गई, जिसमें तस्करी, अवैध वध और सड़कों पर निराश्रित अवस्था में भटकते पशुओं की समस्या प्रमुख है। गोभक्तों ने मांग रखी कि केन्द्र सरकार संविधान में आवश्यक संशोधन कर केन्द्रीय गो सेवा एवं संरक्षण अधिनियम लागू करे तथा इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अलग से केन्द्रीय गो सेवा मंत्रालय और स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया जाए। साथ ही गोवंश को राष्ट्रमाता या राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा देने की भी मांग की गई।
ज्ञापन में गो तस्करी और गोवध को संज्ञेय व गैर-जमानती अपराध घोषित कर दोषियों को आजीवन कारावास और संपत्ति कुर्क करने जैसे कड़े प्रावधान लागू करने की मांग की गई। इसके अलावा गो आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के तहत पंचगव्य उत्पादों को प्रोत्साहन, प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा और सरकारी खरीद प्रणाली से जोड़ने की बात भी रखी गई। बुनियादी ढांचे के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर नंदीशाला और प्रत्येक जिले में आदर्श गोशाला स्थापित करने, गोचर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर संरक्षित करने तथा चारा सुरक्षा कानून लागू करने की मांग भी की गई।
साथ ही राजमार्गांे पर गो-एम्बुलेंस और ट्रॉमा सेंटर की व्यवस्था करने का सुझाव दिया गया, ताकि दुर्घटनाग्रस्त गोवंश को समय पर उपचार मिल सके। शिक्षा के क्षेत्र में भी सुधार की मांग करते हुए स्कूली पाठ्यक्रम में गो-विज्ञान को शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि नई पीढ़ी गोवंश के धार्मिक, वैज्ञानिक और आर्थिक महत्व को समझ सके। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि गोवंश संरक्षण केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि कृषि, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और सतत विकास से जुड़ा राष्ट्रीय मुद्दा है। इसलिए सरकार को इस दिशा में शीघ्र ठोस एवं प्रभावी निर्णय लेने चाहिए।