आप से अलग हुए राज्य सभा सदस्यों को भाजपा सदस्य के रूप में मिली मान्यता, आप की आपत्ति अमान्य
राज्यसभा में दल-बदल से बदले समीकरण, भाजपा और एनडीए हुए और मजबूत
नई दिल्ली। राज्य सभा में आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व उप नेता राघव चढ्ढा सहित पार्टी से अलग हुए सात सदस्यों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा ) में विलय को राज्य सभा के सभापति ने मान्यता दे दी है। इन सदस्यों को भाजपा के सदस्य के रूप में मान्यता दिये जाने की अधिसूचना राज्य सभा सचिवालय ने सोमवार को जारी की।सचिवालय की ओर से सोमवार को दी गयी जानकारी के अनुसार ने आप के उन सात सदस्यों को 24 अप्रैल से ही राज्य सभा में भाजपा दल का सदस्य घोषित किया गया है जिस दिन उनकी ओर से विलय की घोषणा की गयी थी।
राज्य सभा सचिवालय की ओर से सदन में विभिन्न दलों के सदस्यों की 24 अप्रैल की स्थिति के अनुसार सर्वश्री राघव राघव, डॉ अशोक कुमार मित्तल, हरभजन सिंह, डॉ संदीप कुमार पाठक, डॉ विक्रमजीत सिंह साहनी, श्रीमती स्वाति मालीवाल और श्री राजिंदर गुप्ता शामिल का नाम भाजपा सदस्यों की सूची में शामिल हैं। इससे 245 सदस्यीय राज्यसभा में भाजपा की सदस्य संख्या बढ़कर 113 हो गई है, जबकि भाजपा के नेतृत्ववाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का कुल आंकड़ा 148 हो गया है। दूसरी ओर सदन में आप के सदस्यों की संख्या दस से घट कर तीन रह गयी है। इनमें संजय सिंह (सदन में पार्टी के सदस्य दल के नेता) के साथ नारायण दास गुप्ता और संत बलबीर सिंह के नाम हैं।उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी से निर्वाचित सदस्य राघव चड्ढा, डॉ संदीप कुमार पाठक और डॉ अशोक कुमार मित्तल ने गत 24 अप्रैल को राजधानी में एक संवाददाता सम्मेलन कर राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सात सदस्यों के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की घोषणा की थी।
आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को सदन में पार्टी के उप नेता पद से हटा दिया था। उसी के बाद से पार्टी में समस्या उत्पन्न हुई है। राज्य सभा में आप सदस्य दल के नेता संजय सिंह ने सभापति के समक्ष एक याचिका दायर कर पार्टी के बागी सदस्यों के विरुद्ध कार्रवाई किये जाने और उनकी सदस्यता समाप्त किये जाने की मांग की थी। उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि संविधान की दसवीं अनुसूची के प्रावधानों के अनुसार आप के ये बागी सदस्य सदन की सदस्यता की पात्रता खो चुके है। 1985 में पारित संविधान के 52वें (संशोधन) अधिनियम के अंतर्गत 10वीं अनुसूची को जोड़ा गया था जिसमें दल-बदल निरोधक प्रावधान शामिल है।