आत्मबल के सहारे मिलती है मंजिल

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Anmol Vachan

सरसा। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सुमिरन, भक्ति-इबादत हर पल, हर समय, हर इन्सान को करते रहना चाहिए। जैसे-जैसे आप सुमिरन करते जाते हैं, वैसे-वैसे आपको अंदर से शक्ति, आत्मबल मिलता जाता है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि आत्मबल के सहारे आप हर मंजिल को पा सकते हैं और मंजिलें आपके कदम चूमने लग जाएंगी। आत्मविश्वास हो तो पहाड़ जैसे रोग को भी इन्सान कंकर बना देता है और आत्मविश्वास न हो तो कंकर भी पहाड़ बन जाया करता है। आप जी फरमाते हैं कि यह आत्मविश्वास बाजार से खरीदा नहीं जा सकता, आत्मबल सबके अंदर है और यह अल्लाह, वाहेगुरू, राम की भक्ति से मिलता है।

आप ज्यों-ज्यों सुमिरन करते जाएंगे, त्यों-त्यों आत्मबल हासिल होता जाएगा। जैसे दूध में घी, धरती में पानी और फूलों में खुशबू हैं पर उनको निकालने का ढंग है, उस तरीके से अगर आप चलते हैं तो फूलों से खुशबू, धरती से पानी और दूध से घी लिया जा सकता है। उसी तरह आत्मबल, विलपॉवर आपके अंदर है और उसको हासिल करने के लिए गुरूमंत्र, मैथड आॅफ मेडिटेशन का अभ्यास करना पड़ता है। लगातार सुमिरन करते जाओ तो अंदर-बाहर तमाम खुशियां मिलनी शुरू हो जाएंगी, आत्मबल बढ़ जाएगा और हर तरह की परेशानी का आपको आपके अंदर से हल मिलने लग जाएगा।

रूहानी मजलिस में फरमाया कि अगर आप उस परमपिता परमात्मा को देखना चाहते हैं, उसे महसूस करना चाहते हैं तो उसके लिए प्रभु के नाम का सुमिरन करना होगा। मालिक की भक्ति और उसकी सृष्टि की सेवा हमेशा खुशियां देती है। आप जी ने आगे फरमाया कि जो वचन सुनते हैं, मानते हैं, वचनों को जीवन में अपना लेते हैं, उनकी झोलियां खुशियों से मालामाल रहती है। इसलिए अपने अंत:करण की मैल को दूर करो और सुमिरन, भक्ति के द्वारा भावना को शुद्ध करो। कभी भी नैग्टिव न सोचो, पोजटिव रहो। पूज्य गुरू जी ने फरमाया कि हमेशा मालिक से अच्छा ही मांगो, भला मांगो, बुरा न मांगा करो। भला करो, भला मांगो, मालिक को मालिक से मांगो। जब मांगना ही है तो बजाय नैग्टिव के पोजटिव क्यों नहीं सोचते, कि मालिक तू मिल जा, जब वो मिल जाएगा तो उसका रहमों कर्म बरसेगा ही बरसेगा।

 

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