Children's story: आँगन में सावन की फुहारें और नेहा का अनोखा जन्मदिन
बारिश बनी खुशियों का सबसे प्यारा तोहफा
सावन का महीना था। सुबह से घने बादल छाए हुए थे। हवा में ठंडी ठंडी खट-खट आ रही थी और पत्तों पर मोतियों जैसी फुहारें टिक रही थीं। स्कूल की छुट्टी मिलते ही छोटे-छोटे बच्चे झुंड-बझुंड आँगन में खेलने लगे। सबसे ज्यादा उत्साहित थी छोटी-सी नेहा। आज उसका जन्मदिन था।
नेहा ने प्यारी-सी नीली सलवार पहनी थी जिस पर सफेद फूलों की कढ़ाई थी। उसकी माँ ने माथे पर तिलक लगाया और हाथ में हल्की-सी चूड़ियाँ पहनाई थीं। नेहा ने अपनी छोटी-छोटी हथेलियों में रंग-बिरंगे गुब्बारे पकड़े थे। ‘आज मेरे लिए बरसात ने भी इंतजार किया,’ नेहा ने खुशी से कहा। उसके दांतों के बीच मुस्कान चमक रही थी।
आँगन के बीचों-बीच एक बड़ा पलंग रखा था। माँ ने गुड़-घिया के बने मीठे लड्डुओं का डिब्बा रखा और दादी ने बांस का छोटा सा चूड़ा बुनकर नेहा के लिए बनवाया। पड़ोसी नेतू अंकल ने छत से कागज की पतंगें उतारीं और बच्चों को बांटीं। हर किसी की बाहें खुशियों से भरी थीं। फुहारें धीरे-धीरे ज्यादा होने लगीं। छोटे-छोटे पानी के बूँदें नेहा के चेहरे पर चमकती हुई गिरीं। नेहा ने अपनी छोटी-सी जीभ बाहर निकाली और एक-एक बूँद चाटने लगी-‘यह स्वाद भी मीठा है!’ उसने हँसकर कहा।
सब बच्चे उसके साथ खेल में लग गए। मिट्टी की गोले बनाकर एक-दूसरे को छींटे मारे। नेहा के बाल भीग गए, पर उसे कोई परवाह नहीं थी-बूंदों का संग उसका सबसे अच्छा तोहफा था। फुहारों के बीच लड़कों ने रिमझिम-सी मछली पकड़ने जैसा खेल बनाया। नेहा ने कहा, ह्लआओ, हम बारिश की छोटी कछुए बनेंगे!ह्व सबने ठहाका लगाया और कूद-कूद कर तालाब बना कर उसमें मस्ती करने लगे। एक पल के लिए ऐसा लगा, मानो पूरा आँगन एक छोटा-सा जादुई ताल बन गया हो।
दोपहर को माँ ने चावल और दाल के साथ पराठे बनाए। बच्चों ने घनघनाती बारिश के बीच पराठे खाए और गर्म चाय के घूँट लिए। दादी ने पुराने गीत गाए, और सबने मिलकर तालियाँ बजाई। तभी आसमान ने बड़ा सा सरप्राइज दिया-बादल झट से थम गए और धूप की एक पतली किरण निकली। उस किरण में फुहारों की छोटी-छोटी बूँदें इंद्रधनुष की तरह चमकने लगीं। नेहा ने अपनी आँखें बंद कर लीं और दुआ सी मांगी-‘हे बारिश रानी, तुम्हारा धन्यवाद। आज तुमने मेरा जन्मदिन और भी खास बना दिया।’ सबने मिलकर नेहा के लिए छोटी-सी केक निकाली। मिठास और खुशबू ने आँगन को और भी प्यारा बना दिया।
नेहा ने मोमबत्ती बुझाई और सभी ने गाना गाया-ह्लजन्मदिन मुबारक हो, नेहा, जन्मदिन मुबारक हो!ह्व शाम होते-होते बरसात की फुहारें कम हो गईं और आँगन में खुशियों की हल्की-सी रौनक बची रही। नेहा की माँ ने उसे गले लगाया और कहा, ‘तेरे जैसे मासूम बच्चों की हंसी ही तो बरसात को भी गीत बनाती है।’ नेहा ने अपनी छोटी-सी हथेली में एक गीला पत्ता पकड़ा और मुस्कुरा कर बोली, ‘मैं आज बारिश की राजकुमारी थी।’ इस तरह, सावन की फुहारों के बीच नेहा का जन्मदिन यादों के पन्नों में खुशियों की तरह गूंथा गया-छोटी-छोटी बूँदें, हँसी की आवाजें, और दोस्तों के संग की मस्ती। नेहा के दिल में वह दिन हमेशा चमकता रहेगा
कोमल सांखला, हिसार