लघू कथा: पीलू गया शहर

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Children Story: एक था पीलू ततैया। वह लालची था उसे जब भी कुछ खाने की चीज दिखाई देती वह उस पर टूट पड़ता। एक दिन उड़ते-उड़ते पीलू ततैया शहर जा पहुंचा। वहां मंडी में गुड़ के बड़े-बड़े ढेर लगे थे। उन पर बहुत से ततैये बैठे मजे से गुड़ का स्वाद ले रहे थे। Children Story
पीलू भी वही एक ढेर पर जा बैठी। गुड़ खाने के चक्कर में उसे ध्यान ही रहा कि अब दिन छिपने वाला है। वहां बैठे सभी ततैये तो अपने-अपने छत्तों की ओर उड़ चले। बस पीलू आंख मीचे गुड़ खाने में लगा रहा। सेठ जी के नौकर ने दुकान बन्द करने की तैयारी शुरू कर दी। उसने गुड़ के बोरी में भरा तो पीलू उसी बोरे में बंद हो गया। उधर पीलू के पापा नीटू ततैये और उसकी मम्मी टिन्नी ततैये ने सारे जंगल में पीलू को आवाज लगाई पीलू उ उ ओ पीलू उ उ पीलू बेटा….।
किंतु पीलू नहीं मिला। मिलता भी भला कैसे? वो तो सेठ जी की दुकान पर गुड़ के बोरे में बंद था। नीटू और टिन्नी सारी रात पीलू के न मिलने की वजह से परेशान रहे। उन्होंने अगली सुबह फिर पीलू की तलाश शुरू की। उन दोनों को परेशान देख सीलू बंदर ने पूछा-क्या बात हैं नीटू-टिन्नी, तुम परेशान क्यों हो? हमारा पीलू बेटा नहीं मिल रहा, सीलू भैया, दोनों ने एक साथ कहा। सीलू बंदर बोला-कल मैंने उसे शहर की तरफ जाते देखा था। हो सकता है शहर में ही कहीं हो। तुम उसे शहर जाकर ढूंढना। नीटू ततैया और टिन्नी ततैन शहर की ओर उड़ चले। Children Story
मंडी में उन्हें एक गुड़ का ढेर के पास पीलू रोता हुआ मिला। क्या हुआ बेटा? उन्होंने पूछा। मेरी एक टांग टूट गयी है मां, रोते हुए पीलू बोला, रात मैं गुड़ के बोरे में बंद हो गया था मां, सारी रात बाहर निकलने की कोशिश की पर निकल न सका। सुबह सेठ जी के नौकर ने गुड़ की बोरी पटड़ी पर पलटी तो गुड़ गिरने से मेरी टांग टूट गयी। ओह मां, बहुत दर्द है। नीटू और टिन्नी ने पीलू को उठा लिया। जंगल ले जाकर उसे चिन्नी चिड़िया के अस्पताल में भर्ती करवा दिया। चिन्नी ने उसकी टांग पर प्लास्टर चढ़ा दिया। नर्स मुनमुन मैना ने पीलू को समझाया, पीलू तुम शहर जाकर गुड़ का लालच न करते तो तुम्हारी टांग नहीं टूटती और तुम्हें अस्पताल नहीं आना पड़ता। हां, सिस्टर मुनमुन, गलती मेरी थी। मैंने लालच किया। अब लालच नहीं करूंगा। पीलू ने वादा किया। एक महीने बाद पीलू का प्लास्टर काटा गया। अब पीलू ने लालच करना छोड़ दिया। Children Stor                                                         –  अनिल शर्मा

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