SIM Card Fraud: 'डिजिटल अरेस्ट' मामले में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, सिम बॉक्स नेटवर्क का खुलासा

ओडिशा में 10 ठिकानों पर छापेमारी, सिम बॉक्स धोखाधड़ी के आरोप में बिहार डिस्ट्रीब्यूटर गिरफ्तार

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SIM Card Fraud: नई दिल्ली, (सच कहूँ/एजेंसी)। साइबर अपराध और डिजिटल ठगी के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने बिहार के वैशाली और ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले में कुल 10 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान एक टेलीकॉम कंपनी के एरिया डिस्ट्रीब्यूटर को गिरफ्तार किया गया है। उस पर फर्जी तरीके से बड़ी संख्या में सिम कार्ड जारी कराने और उन्हें अवैध सिम बॉक्स नेटवर्क तक पहुंचाने में भूमिका निभाने का आरोप है।

सीबीआई के अनुसार, तलाशी के दौरान कई डिजिटल उपकरण जांच के दायरे में आए। इनमें मोबाइल फोन, लैपटॉप और सिम कार्ड शामिल हैं। एजेंसी का कहना है कि इन उपकरणों से मामले से संबंधित कई आपत्तिजनक जानकारियां मिली हैं। जांच में सामने आया कि वैशाली जिले के महुआ क्षेत्र में काम करने वाले संबंधित टेलीकॉम डिस्ट्रीब्यूटर ने बड़ी संख्या में सिम कार्ड जारी कराने में कथित तौर पर नियमों का उल्लंघन किया। सीबीआई के मुताबिक, ये सिम कार्ड आगे अवैध सिम बॉक्स संचालन में इस्तेमाल किए गए। दरअसल, यह मामला बिहार के सुपौल जिले में पिछले साल सामने आए एक अवैध सिम बॉक्स नेटवर्क से जुड़ा है। शुरुआत में इसकी जांच बिहार पुलिस कर रही थी, लेकिन बाद में राज्य सरकार ने मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दिया।

एक जगह से मिले थे 1,300 से अधिक सिम कार्ड

सीबीआई की जांच के दौरान उस मकान से 1,300 से ज्यादा सिम कार्ड बरामद किए गए, जहां कथित तौर पर सिम बॉक्स चलाया जा रहा था। एजेंसी ने इन सिम कार्ड से जुड़े डेटा का विस्तृत विश्लेषण किया। जांच में ऐसे संकेत मिले कि यह नेटवर्क देशभर में साइबर अपराध के कम से कम 73 मामलों से जुड़ा हो सकता है। इनमें डिजिटल अरेस्ट के नाम पर की गई ठगी के मामले भी शामिल बताए गए हैं।

सीबीआई के मुताबिक, बरामद सिम कार्ड के डेटा की जांच के बाद कई संदिग्ध पॉइंट ऑफ सेल की पहचान की गई। इनमें बड़ी संख्या में सिम बिहार और ओडिशा से जारी किए जाने की जानकारी सामने आई। एजेंसी का दावा है कि 700 से ज्यादा सिम कार्ड बिहार के वैशाली जिले में स्थित एक टेलीकॉम कंपनी के एरिया डिस्ट्रीब्यूटर के जरिए जारी किए गए। इसके लिए एक दर्जन से अधिक पॉइंट ऑफ सेल से जुड़ी जानकारियों का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया।

ग्राहकों के दस्तावेज और बायोमेट्रिक डेटा के दुरुपयोग का शक

जांच में कुछ ऐसे ग्राहक भी सामने आए, जिन्होंने बताया कि उनके नाम पर अतिरिक्त सिम कार्ड जारी होने की उन्हें जानकारी नहीं थी। सीबीआई के अनुसार, कुछ मामलों में ग्राहकों से वास्तविक जरूरत के नाम पर ई-केवाईसी के लिए कई बार मंजूरी ली गई, जबकि कुछ मामलों में पहले किसी अन्य उद्देश्य से लिए गए बायोमेट्रिक डेटा के कथित दुरुपयोग की आशंका है।

सीबीआई अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग कौन हैं और जारी किए गए सिम कार्ड का इस्तेमाल किन-किन साइबर अपराधों में किया गया। मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी, जबरन वसूली, पहचान की चोरी और सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत कंप्यूटर संबंधी अपराधों सहित टेलीकम्युनिकेशन एक्ट, 2022 के प्रावधानों के तहत जांच की जा रही है। सीबीआई ने कहा है कि तलाशी के दौरान मिले डिजिटल साक्ष्यों और सिम कार्ड से जुड़े डेटा का आगे विश्लेषण किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद नेटवर्क में शामिल अन्य संदिग्धों की भूमिका भी स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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