जागरूकता और संवाद से बचाई जा सकती है अनमोल जिंदगी
एसकेडीयू के नैदानिक मनोविज्ञान विभाग का खुदकुशी रोधक सप्ताह, स्कूलों में कार्यशालाओं के जरिए विद्यार्थियों को किया जागरूक
हनुमानगढ़। श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय के नैदानिक मनोविज्ञान विभाग की ओर से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और खुदकुशी की रोकथाम के उद्देश्य से 7 से 12 सितंबर तक आत्महत्या रोधक सप्ताह आयोजित किया गया। अभियान के तहत कक्षा 8वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य, तनाव और भावनात्मक समस्याओं के प्रति जागरूक करने के लिए शहर के विभिन्न विद्यालयों में कार्यशालाएं आयोजित की गईं।
अभियान में गुड डे सैनिक स्कूल, डीएवी स्कूल, लिटिल फ्लावर कॉन्वेंट स्कूल सहित अन्य विद्यालयों के विद्यार्थियों को शामिल किया गया। कार्यशालाओं में विद्यार्थियों को खुदकुशी के कारणों, चेतावनी संकेतों, बचाव एवं रोकथाम के उपायों तथा मानसिक तनाव से निपटने के तरीकों की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को अपनी भावनाओं को खुलकर साझा करने और जरूरत पड़ने पर परिवार, शिक्षकों तथा विशेषज्ञों से सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया।
श्री गुरु गोबिंद सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने कहा कि प्रत्येक जीवन अनमोल है। कठिन परिस्थितियों में सही मार्गदर्शन, संवाद और सहयोग किसी व्यक्ति की जिंदगी बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना समय की आवश्यकता है। खुदकुशी की रोकथाम के लिए परिवार, शिक्षक, मित्र और समाज सभी को संवेदनशीलता के साथ अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन वरुण यादव ने कहा कि किशोरावस्था जीवन का संवेदनशील दौर होता है। इस समय विद्यार्थियों को भावनात्मक सहयोग, उचित मार्गदर्शन और अपनी समस्याएं साझा करने के लिए सुरक्षित वातावरण मिलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान खुदकुशी नहीं है, बल्कि हर कठिन परिस्थिति से निकलने के लिए सहायता और समाधान उपलब्ध हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद कुमार सिंह ने बताया कि किशोरावस्था में विद्यार्थियों को मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक बदलावों से गुजरना पड़ता है। ऐसे समय में सही जानकारी और समय पर सहयोग देकर गंभीर परिस्थितियों को टाला जा सकता है।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय का मनोविज्ञान विभाग पिछले चार वर्षांे से लगातार खुदकुशी रोधक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। अभियान में विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद कुमार सिंह, अध्यापक वर्षा अरोड़ा एवं पौलोमी घोष सहित मनोविज्ञान विभाग के विद्यार्थियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि जीवन की हर समस्या का समाधान संभव है और कठिन समय में चुप रहने के बजाय विश्वसनीय परिजनों, शिक्षकों एवं विशेषज्ञों से बात करना जरूरी है। जागरूकता, संवाद और समय पर सहयोग से अनमोल जिंदगियों को बचाया जा सकता है।