दंत चिकित्सक को एपीओ करने के मामले ने पकड़ा तूल, चिकित्सकों में आक्रोश

सेवारत चिकित्सकों ने दी बेमियादी समय के लिए कार्य बहिष्कार की चेतावनी

हनुमानगढ़। रावतसर के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में गत दिनों नगर पालिका के पार्षदों व नागरिकों की ओर से किए गए धरना-प्रदर्शन के बाद महिला दंत चिकित्सक विमलेश सहू को एपीओ करने से सेवारत चिकित्सकों में आक्रोश है। सेवारत चिकित्सकों ने दंत चिकित्सक के एपीओ आदेशों को निरस्त करने व सीएचसी प्रभारी की ओर से दर्ज करवाए गए मुकदमे में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई न होने सहित चार सूत्री मांगें न माने जाने पर 28 नवंबर से आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर बेमियादी समय के लिए कार्य बहिष्कार करने की चेतावनी दी। इस संबंध में अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ के बैनर तले सेवारत चिकित्सकों ने शुक्रवार को टाउन के राजकीय जिला चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश पोटलिया को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा।

संघ अध्यक्ष डॉ. वेदपाल बिजारणिया ने कहा कि रावतसर के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में असामाजिक तत्वों की ओर से बार-बार धरना-प्रदर्शन एवं राजकीय कार्यों में बाधा उत्पन्न की जाती है। इससे कार्यव्यवस्था में व्यवधान एवं अस्पताल प्रशासन पर बेवजह दवाब बनाया जाता है। इस तरह के वातावरण में चिकित्साकर्मियों की ओर से कार्य संपादन किया जाना सहज नहीं है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में प्रशासन की ओर से रावतसर सीएचसी की दंत चिकित्सक विमलेश सहू को एपीओ कर दिया गया है। इससे चिकित्सक वर्ग में आक्रोश व्याप्त है। सीएचसी प्रभारी की ओर से रावतसर पुलिस थाना में दर्ज करवाई गई एफआईआर में भी चिकित्सकीय परिचर्या अधिनियम 2008 की धारा नहीं जोड़ी गई है। इस संबंध में जिला कलक्टर को ज्ञापन प्रेषित किया जा चुका है।

सेवारत चिकित्सकों ने मांग की कि दंत चिकित्सक विमलेश सहू के एपीओ आदेशों को तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाए, सीएचसी प्रभारी की ओर से दायर एफआईआर में चिकित्सकीय परिचर्या अधिनियम 2008 सम्मिलित की जाए, दोषियों को तुरंत प्रभाव से गिरफ्तार कर कार्रवाई की जाए व भविष्य में किसी भी चिकित्सक को जांच में दोषी पाए बिना एपीओ न किया जाए। मांगें नहीं माने जाने पर सेवारत चिकित्सकों ने शनिवार, रविवार को विरोध स्वरूप काली पट्टी बांध कर चिकित्सकीय कार्य करने व 28 नवंबर से बेमियादी समय तक जिले में आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर पूर्णतया कार्य बहिष्कार करने की चेतावनी दी। इस मौके पर डॉ. रवि शंकर शर्मा सहित कई सेवारत चिकित्सक मौजूद थे।

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