Literature

Literature: दस रुपये की जिंदगी

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जीवन चलने का नाम Literat...
corona-sufferer

कोरोना पीड़ित

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पिंकी ये, पिंकी वो, डोंट नो कैसे झेलती हो ऐसे पति को। मैं चुप रही, झेलती तो हूं, लेकिन केवल उन्हें नहीं तुम सबको भी साथ में। चश्मा पति को दे फिर कॉफी बनाने की लिए जाने लगी तो पति ने उसे अपने पास बैठा लिया,थोड़े देर पास बैठो, अब घर पर हूं तो पास भी नहीं आओगी।
Father

Father: पिता

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शाह ने खाना पहुँचाने वाले सैनिक से औरंगजेब को अनेकों बार खबर भिजवाई कि वह उससे मिलना चाहता है, पर औरंगजेब एक बार भी मिलने नहीं आया। अब शाह का कलेजा जलता रहता था।

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