प्रेरक प्रसंग: जरूरतमंद को अपनी क्षमता अनुसार शरण दीजिए

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Give-Shelter

एक गरीब आदमी की झोपड़ी, जहां रात को जोरों की वर्षा हो रही थी। सज्जन था, छोटी सी झोपड़ी थी। स्वयं और उसकी पत्नी, दोनों सोए थे। आधी रात किसी ने द्वार पर दस्तक दी। उन सज्जन ने अपनी पत्नी से कहा-उठ! द्वार खोल दे। पत्नी द्वार के करीब सो रही थी। पत्नी ने कहा: इस आधी रात में जगह कहां है? कोई अगर शरण माँगेगा तो तुम मना न कर सकोगे? वर्षा जोर की हो रही है। कोई शरण माँगने के लिए ही द्वार आया होगा न! जगह कहाँ है? उस सज्जन ने कहा: जगह? दो के सोने के लायक तो काफी है, तीन के बैठने के लायक काफी हो जाएगी। तूं दरवाजा खोल! लेकिन द्वार आए आदमी को वापिस तो नहीं लौटाना है। दरवाजा खोला। कोई शरण ही मांग रहा था। भटक गया था और वर्षा मूसलाधार थी। वह अंदर आ गया। तीनों बैठकर गपशप करने लगे। सोने लायक तो जगह न थी।

थोड़ी देर बाद किसी और आदमी ने दस्तक दी। फिर उस सज्जन ने अपनी पत्नी से कहा: खोल! पत्नी ने कहा: अब क्या करोगे? जगह कहाँ है? अगर किसी ने शरण माँगी तो? उस सज्जन ने कहा: अभी बैठने लायक जगह है फिर खड़े रहेंगे। मगर दरवाजा खोल! जरूर कोई मजबूर है। फिर दरवाजा खोला। वह अजनबी भी आ गया। अब वे खड़े होकर बातचीत करने लगे। इतना छोटा झोपड़ा! और खड़े हुए चार लोग! और तब अंतत: एक कुत्ते ने आकर जोर से आवाज की, दरवाजे को हिलाया। सज्जन ने कहा: दरवाजा खोलो। पत्नी ने दरवाजा खोलकर झांका और कहा: अब तुम पागल हुए हो! यह कुत्ता है। आदमी भी नहीं!

सज्जन बोले: हमने पहले भी आदमियों के कारण दरवाजा नहीं खोला था, अपने हृदय के कारण खोला था! हमारे लिए कुत्ते और आदमी में क्या फर्क? हमने मदद के लिए दरवाजा खोला था। उसने भी आवाज दी है। उसने भी द्वार हिलाया है। उसने अपना काम पूरा कर दिया, अब हमें अपना काम करना है। दरवाजा खोलो! उनकी पत्नी ने कहा: अब तो खड़े होने की भी जगह नहीं है! उसने कहा: अभी हम जरा आराम से खड़े हैं, फिर थोड़े सटकर खड़े होंगे और एक बात याद रख! यह कोई अमीर का महल नहीं है कि जिसमें जगह की कमी हो! यह गरीब का झोपड़ा है, इसमें खूब जगह है! जगह महलों में और झोपड़ों में नहीं होती, जगह दिलों में होती है! अक्सर आप पाएंगे कि गरीब कभी कंजूस नहीं होता! उसका दिल बहुत बड़ा होता है !

कंजूस होने योग्य उसके पास कुछ है ही नहीं। पकड़े तो पकड़े क्या? जैसे-जैसे आदमी अमीर होता है, वैसे कंजूस होने लगता है, उसमें मोह बढ़ता है, लोभ बढ़ता है। जरूरतमंद को अपनी क्षमता अनुसार शरण दीजिए। दिल बड़ा रखकर अपने दिल में औरों के लिए जगह जरूर रखिये।

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