जीवन से ऊब हटाता है नृत्य

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इसमें कोई शक नहीं कि डांस जीवन से ऊब मिटाकर उसे सरस बनाता है, सौंदर्य बोध बढ़ाता है और विभिन्न कलाओं में रूचि जगाता है। लय और ताल ही तो जीवन है। धरती के कण कण में सुर ताल लय का समावेश है। सूर्योदय से पूर्व नींद से जागते ही सुमधुर संगीत की धुन आपको बिस्तर छोड़ थिरकने व बॉडी मूवमेंट देने को बाध्य कर देती है। जड़ता दूर होती है। शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है। सुरों की लय और नृत्य की झंकार मिल कर मन प्रफुल्लित कर देते हैं। ऐसे में मारक नेगेटिव थॉट्स कभी नहीं आएंगे।
मनोवैज्ञानिक इस बात की पुष्टि करते हैं और मानते हैं कि डांस स्टेऊस बूस्टर का काम करता है। टेंशन दूर कर मन को बोझिलता से मुक्ति दिलाता है। जिन बच्चों में बिहेवियर प्रॉब्लम होती हैं और जो हाइपर होते हैं, आॅटिस्टिक या मेंटली चैलेंज्ड होते हैं, उन्हें म्यूजिक थेरेपी से काफी फायदा होता है। उनमें एकाग्रता बढ़ती है। वे चीजों पर फोकस करना सीखते हैं जो धीरे-धीरे दिमाग के लिए सही दिशा निर्धारण करने में सहायक होता है।
वर्तमान जीवन शैली का सबसे विपरीत असर बच्चों पर पड़ रहा है। बच्चों का मन कोमल और गीली मिट्टी सा होता है, जिसे बड़े अपनी इच्छानुसार ढाल सकते हैं लेकिन बड़े भी क्या करें। उन पर भी जमाने के साथ कदमताल मिलाने का प्रेशर है। जब बच्चे कोर्स की किताबों में सर खपा-खपा कर परेशान हो जाते हैं तो उन्हें ब्रेक चाहिए।
ऐसे में डांस एक अच्छा स्ट्रेस रिलीवर है। न बाहर जाने की जहमत, न पैसों का खर्च, बस अच्छा सा म्यूजिक लगा कर थिरक उठे कदम। यह बदलाव ऊर्जा के साथ बच्चों को आत्मविश्वास भी देगा। बच्चे चाहें तो मम्मी भी उन्हें जॉइन कर सकती हैं। यह क्रिएटिव चैनल बच्चों को खुराफाती होने से भी बचाएगा।
नये जमाने का अभिशाप हैं कुछ ऐसी बीमारियां जिनका कारण अधिकतर अत्यंत सुख सुविधा पूर्ण जीवन को माना जाता है। धनाढ्य श्रेणी में इतने ऐशपरस्त और आलसी लोग मिलेंगे, जो किसी भी काम के लिए हाथ तक हिलाना नहीं जानते। उनका बस चले तो वे रिमोट कंट्रोल के बटन भी न दबाकर मात्र पलक झपकाकर ही अपना मकसद पूरा करें।

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